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अमित शाह और प्रकाश जावड़ेकर की टीम लिखेगी दिल्ली में भाजपा की सफलता की कहानी!

Tue, 07 Jan 2020 07:28 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Amit Shah, Prakash Javadekar - फोटो : Social Media
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बूथस्तर के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में भाजपा की जीत का कई मंत्र दिया है। इसमें घर-घर जाओ का अभियान काफी अहमियत रखता है। भाजपा के पास देश के सबसे लोकप्रिय राजनेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा भी है, लेकिन अमित शाह और प्रकाश जावड़ेकर की टीम चुनाव में सफलता का डिजाइन तैयार करेगी।

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भाजपा अध्यक्ष और जावड़ेकर दोनों की खूबी है कि सभी आग्रह, पूर्वाग्रह को दरकिनार करके व्यापक होमवर्क के साथ नए सिरे से सफलता का मंत्र गढ़ते हैं।

राजस्थान और कर्नाटक में जावड़ेकर ने संभाला था मोर्चा

2018 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए कर्नाटक की राह बहुत आसान नहीं थी। बसपा, जद(एस), कांग्रेस पार्टी के बीच में चुनावी तालमेल के बाद यह लड़ाई काफी कठिन हो गई थी। भाजपा ने चुनाव से कुछ महीने पहले ही प्रकाश जावड़ेकर को कर्नाटक का टास्क दिया था। जावड़ेकर ने भाजपा नेताओं के बीच में समन्वय का फार्मूला तैयार करके अमित शाह के साथ मिलकर रास्ता बनाया। जब चुनाव नतीजा आया तो भाजपा बहुमत से बस कुछ सीटें दूर थी।
 

2018 में ही भाजपा के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में सबसे मुश्किल काम राजस्थान ही था। प्रकाश जावड़ेकर को पार्टी ने यहां भी लगाया। राजस्थान में वसुंधरा राजे के विरुद्ध सरकार विरोधी लहर चलने के बावजूद भाजपा कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। जावड़ेकर दिल्ली में भी इसी सूझ-बूझ के साथ लगे हैं। वह न केवल स्थानीय मुद्दे उठाने में माहिर हैं, बल्कि संगठन में रहने के कारण चुनावी रंग देने की कला भी जानते हैं। इसके लिए उनके पास हमेशा एक रिसर्च टीम रहती है।

अमित शाह का कोई सानी नहीं

भाजपा को अपने अध्यक्ष पर बहुत भरोसा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अमित शाह पर अटूट भरोसा करते हैं। शाह राजनीतिक जमीनी सच्चाई सूंघने में अव्वल दर्जा रखते हैं। वह मतदान से पहले नतीजे की भविष्यवाणी कर देते हैं और यह करीब-करीब सही रहती है। कारण साफ है। अमित शाह न केवल पार्टी के प्रत्याशी चयन में पूरी सावधानी बरतते हैं, बल्कि रिसर्च कराने, जनता का मूड भांपने, जातिगत, सामाजिक समेत अन्य समीकरण को बिना हवा लगे खड़ा करने में शाह का कोई जवाब नहीं है।

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव-2014, 2019, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2014 समेत अन्य इसका उदाहरण हैं। शाह आक्रामक चुनाव प्रचार में भरोसा रखते हैं। सोशल मीडिया से लेकर हर स्तर पर कैंपेन में पार्टी को नया आधार देने में सफल रहते हैं। सूत्र बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष ने पिछले कई महीने से काफी होमवर्क करते हुए दिल्ली में जमीनी हकीकत जानने के लिए पार्टी और जनता के बीच में कई स्तर पर सर्वे भी कराया है।

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