दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने एमसीडी के वार्डों का परिसीमन करने के दौरान राजनीतिक दलों व आम लाेगों की ओर से आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद खामियां दूर नहीं की। इतना ही नहीं, चुनाव आयोग ने वार्डों का परिसीमन करते समय नियमों का पालन नहीं किया है। एमसीडी के अधीन आने वाले 68 विधानसभा क्षेत्रों में एक तिहाई से अधिक विधानसभा क्षेत्रों के वार्डों में आबादी का बड़ा अंतर है, जबकि वार्डों में करीब-करीब एक समान आबादी होनी चाहिए।
दो वार्डों का नाम एक ही काॅलोनी के नाम रखा
दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने एमसीडी के वार्डों का परिसीमन करने के दौरान कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा वाली कहावत चरितार्थ की है। आयोग ने आनन-फानन में वार्ड का परिसीमन करते हुए वार्डों के नाम रखने में भी लापरवाही बरती है। आयोग ने साथ लगे दो विधानसभा क्षेत्रों के एक-एक वार्ड का नाम एक ही काॅलोनी के नाम पर तय किया है। आयोग ने जनकपुरी विधानसभा क्षेत्र के अधीन वार्ड नंबर 105 का नाम महावीर एन्क्लेव तय किया है, जबकि इसी विधानसभा क्षेत्र से सटे पालम विधानसभा क्षेत्र के अधीन वार्ड नंबर 137 का भी नाम महावीर एन्क्लेव रख दिया है।
परिसीमन के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी कांग्रेस
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि एमसीडी के वार्डों के परिसीमन की फाइनल रिपोर्ट भाजपा की जीत सुनिश्चित करने और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मौन सहमति से बनाई गई है। मूल अवधारणा और किए गए वायदों से अलग लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रख बनाई गई परिसीमन रिपोर्ट में वार्डों में जनसंख्या समीकरण का उल्लंघन, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को अलग-थलग कर नियमों की पूरी तरह से अवहेलना की गई है।
इसके खिलाफ दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया। पार्टी कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष चौ. अनिल कुमार ने कहा कि परिसीमन रिपोर्ट को जब ड्राफ्ट रिपोर्ट की तरह जस का तस ही बनाकर लाना था तो फिर दिल्ली की जनता से सुझाव और शिकायतें मांगकर चुनाव आयोग ने गुमराह क्यों किया गया। कांग्रेस ने ड्राफ्ट परिसीमन की गहन समीक्षा कर चुनाव आयोग के समक्ष 168 शिकायत/सुझाव जमा किए थे, परंतु चुनाव आयोग ने उन पर कोई विचार न करके सभी गृह मंत्रालय को भेज दिए और भाजपा को फायदा पहुंचाने वाली परिसीमन रिपोर्ट की अधिसूचना जारी कर दी।