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Delhi News : समालोचक मैनेजर पांडेय के जाने से हिंदी साहित्य का आंगन हो गया सूना, लेखक-पाठकों ने किया याद

Mon, 07 Nov 2022 03:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

Delhi : उन्हें पढ़ा और सुना। वह सुवक्ता थे। उनकी किताबें सोचना सिखाती हैं और अपने सीखे से बदलने के लिए अभिप्रेरित करती हैं। रविवार को हिंदी के वरिष्ठ आलोचक मैनेजर पांडेय के निधन के बाद साहित्यिक जगत के लोगों ने कुछ इस तरह से याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
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मैनेजर पांडेय...
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विस्तार
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हिंदी साहित्य का आंगन मैनेजर पांडेय के जाने से सूना हो गया। उन्हें पढ़ा और सुना। वह सुवक्ता थे। उनकी किताबें सोचना सिखाती हैं और अपने सीखे से बदलने के लिए अभिप्रेरित करती हैं। रविवार को हिंदी के वरिष्ठ आलोचक मैनेजर पांडेय के निधन के बाद साहित्यिक जगत के लोगों ने कुछ इस तरह से याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लंबे समय तक हिन्दी के प्रोफेसर और जेएनयू में भारतीय भाषा केन्द्र के अध्यक्ष रहे मैनेजर पांडेय ने 82 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। 

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मैनेजर पांडेय के पुत्र राहुल पांडेय ने बताया कि सोमवार को शाम चार बजे लोधी रोड स्थित शमशान में उनके पिता का अंतिम संस्कार किया जाएगा। वह पिछले कई महीनों से मधुमेह रोग से ग्रसित थे। वसंत कुंज स्थित एक निजी अस्पताल से उनका इलाज चल रहा था। मैनेजर पांडेय के निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर है। तमाम लेखकों, पत्रकार और प्रकाशन संस्थानों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। 

साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवासराव ने कहा है कि डॉ मैनेजर पांडेय का जाना भारतीय साहित्य की अपूरणीय क्षति है। राजकमल प्रकाशन समूह के संपादक सत्यानंद निरुपम, प्रसिद्ध लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल, ऋषिकेश सुलभ और कहानीकार सिनीवाली शर्मा जैसे लेखकों और साहित्यकारों ने मैनेजर पांडेय को श्रद्धांजलि अर्पित की है। 
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पाण्डेय का जन्म 23 सितंबर 1941 को बिहार के गोपालगंज जिले के लोहटी में हुआ था। उन्होंने हिंदी आलोचना के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान दिया। उनकी गंभीर आलोचनात्मक लेखन में अलग पहचान थी। लंबे समय तक जेएनयू के अलावा उन्होंने बरेली कॉलेज और जोधपुर विश्वविद्यालय में भी अध्यापन  कार्य किया। वह एक वरिष्ठ आलोचक थे। उन्हें दिल्ली की हिंदी अकादमी की ओर से 2016-17 का ‘शलाका सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया था।

हिंदी आलोचना को दिया अलग मुकाम
शब्द और कर्म, साहित्य और इतिहास, दृष्टि, साहित्य के समाजशास्त्र की भूमिका, भक्ति आंदोलन और सूरदास का काव्य, अनभै सांचा, संकट के बावजूद और आलोचना की सामाजिकता जैसी उनकी रचनाओं ने हिंदी की आलोचना को अलग मुकाम दिया है।

प्रेमचंद और निराला से रहा लगाव
आलोचक मैनेजर पांडेय युवा लेखकों को मुंशी प्रेमचंद और निराला से सीख लेने की सलाह दिया करते थे और धैर्य रखने की भी सलाह देते थे। वह उन्हें साहित्य को समाज से जोड़ने की सलाह देते थे। साहित्य और साहित्यकारों के लिए होने वाले व्यंग को स्वस्थ परंपरा मानते थे। वह लोक जीवन में तुलसीदास से अधिक प्रेरित व प्रभावित थे। 

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