सत्र अदालत ने भाजपा नेता संबित पात्रा की उस पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नवंबर 2021 के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। इसी के साथ उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया। मजिस्ट्रेट ने दिल्ली पुलिस को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा अब रद्द किए गए कृषि कानूनों का समर्थन करने संबंधी कथित रूप से छेड़छाड़ किया गया वीडियो पोस्ट करने के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
सत्र न्यायाधीश धीरज मोर एक मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ पात्रा की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन के थानाध्यक्ष को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने और पूरी तरह से कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने कहा एटीआर के रूप में पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता जाली वीडियो का प्रवर्तक नहीं है और उसने इसे झूठा होने के बावजूद अपने ट्विटर हैंडल पर अपलोड किया था जो पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध था। इसलिए, किसी भी पक्ष पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना और उनके परस्पर विरोधी हितों को संतुलित करते हुए यह निर्देश दिया जा सकता है कि वर्तमान अपराध के लिए याचिकाकर्ता के दोषी इरादे यदि कोई हो की भी एफआईआर की जांच के दौरान आरोपी के रूप में नाम बताए बिना जांच की जाए।