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दिल्ली सरकार की फिर खिंचाई : कोर्ट ने कहा- सरकार का काम लोगों को आतंकित करना नहीं

Wed, 12 May 2021 03:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • रेट तय किए बिना ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी में गिरफ्तारी पर दिल्ली सरकार को फटकार
  • गौरव सूरी, गौरव खन्ना और अन्य कर्मचारियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रेस्तरां से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जब्त करने के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सरकार का काम लोगों को आतंकित करना नहीं है । आप अपनी कमियों को छुपा रहे हैं। दिल्ली सरकार पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने साफ कहा कि इन उपकरणों के रेट अब तक तय नहीं किए हैं। ऐसे में क्या व्यापार करना अपराध है? सरकार को निष्पक्ष होना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए अदालत गौरव सूरी, गौरव खन्ना और अन्य कर्मचारियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया। 

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साकेत कोर्ट के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने कहा कि प्रत्येक व्यवसाय लागत-लाभ विश्लेषण पर आधारित है। ऐसा व्यवसाय करने वालों के लिए राज्य सरकार का रवैया उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि मांग-आपूर्ति के नियम को लागू क्यों नहीं करना चाहिए। अदालत ने कहा कि वर्तमान में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के मूल्य को तय करने की कोई अधिसूचना नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी एक आदेश पारित किया था, जिसमें अधिकारियों से कहा गया था कि वे बाजार में ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमतों को तय करें। 

हाईकोर्ट ने कभी भी लोगों को जेल में डालने की बात नहीं कही थी। अदालत बार-बार कीमतें तय करने के लिए कह रही हैं, लेकिन आप नहीं कर रहे। बचाव पक्ष ने कहा कि उनके मुवक्किलों ने सभी कंसंट्रेटर आवश्यक शुल्क के भुगतान के बाद आयात किए थे। इतना ही नहीं बिक्री एक आवेदन के माध्यम से हुई थी, बिल काटने के बाद जीएसटी का भी भुगतान किया गया। 
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उन्होंने कहा कि पुलिस ने कालाबाजारी का आरोप लगाया है जबकि एक भी तथ्य नहीं है कि उनके मुवक्किलों ने ऐसा किया, जबकि जो रेट तय किए गए हैं उसी के अनुसार बिक्री की गई। पुलिस ने गत दिनों मैट्रिक्स सेल्युलर के गौरव सूरी, गौरव खन्ना और अन्य के लोदी कॉलोनी व महरोली स्थित ठिकानों पर छापे मारकर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जब्त किए थे। 

वैक्सीन स्टेडियम व खुले स्थान पर लगाने पर विचार का निर्देश

हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया को स्टेडियम सहित अन्य खुले स्थान पर शुरू करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने ये निर्देश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दायर याचिका में मुंबई की तरह वैक्सीन ड्राइव खुले स्थान पर शुरू करने का सुझाव दिया गया था। 

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने दायर याचिका को बतौर ज्ञापन स्वीकार कर उसमें दिए तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने को कहा है। अदालत ने कहा कि निर्णय जल्द से जल्द तय नीति के अनुसार लिया जाए।

यह याचिका अमनदीप अग्रवाल ने दायर की है। उन्होंने तर्क रखा है कि मुंबई में वैक्सीन ड्राइव को स्टेडियम व अन्य खुले स्थान पर शुरू किया गया है। इससे लोग एक दूसरे से संपर्क में नहीं आते और सामाजिक दूरी बनाने में सहायता मिलती है। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएस चंडियोक ने कहा कि लॉकडाउन व कर्फ्यू का कोई औचित्य नहीं रह जाता जब लोग वैक्सीन लगाने के लिए लाइन में एक दूसरे मिल कर खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि वैक्सीन को यदि खुले स्थान में लगाने का निर्णय लिया जाता है तो इससे अस्पतालों मेडिकल स्टाफ पर दाब कम होता और वे कोविड मरीजों का उचित तरीके से इलाज कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि महामारी को देखते हुए सभी लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन लगाना जरूरी है।
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डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करने को कहा

राजधानी में फिलहाल ऑक्सीजन की किल्लत नहीं है और काफी ऑक्सीजन बेड भी खाली हैं। इसके बावजूद आने वाले दिनों में ऑक्सीजन बेड की संख्या और बढ़ाई जाएगी। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है। वहीं केंद्र सरकार ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन भी बढ़ा दिया गया है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने सरकार से कहा कि इन सब मुद्दों के साथ आपको डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करना होगा। इसके अलावा प्लाज्मा डोनेशन पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए नामी-गिरामी लोगों से प्रचार करवाया जाए। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस समय मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार ने कहा कि हम बेड की समस्या को कुछ ही दिनों में खत्म कर देंगे। हम दिल्ली के हर एक नागरिक को उसके इलाज के लिए बेड मुहैया करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है। आज की तारीख में हर महीने एक करोड़ इंजेक्शन का उत्पादन हो रहा है जो मौजूदा और आगे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल पर्याप्त है। 

कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोरोना मरीजों के साथ अटेंडेंट को रखने पर विचार होना चाहिए। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां पर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं होता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्लाज्मा डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए मीडिया और नामी-गिरामी हस्तियों की मदद लेनी होगी। जब नामी-गिरामी हस्तियां अपील करती हैं तो उससे लोग जुड़ते हैं। उनसे देश के लिए प्लाज्मा डोनेट करने की अपील करवाएं। आप क्रिकेटर, फिल्म स्टार और राजनीति के क्षेत्रों से जुड़े लोगों की मदद लेकर प्लाज्मा डोनेशन की मुहिम आगे बढ़ाएं।
कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन को ओपन करने के लिए बहुत नियंत्रण और सतर्कता बरतनी होगी, जिससे राज्य आने वाले कोरोना के मामलों से निपट सकें। वकील गौतम नारायण ने कहा कि गलती हमने भी की है हमने भी ढिलाई बरती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने भी एक भूमिका निभाई है, हमने चुनाव कराए और हमने मेला आयोजित किए।
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