हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया को स्टेडियम सहित अन्य खुले स्थान पर शुरू करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने ये निर्देश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दायर याचिका में मुंबई की तरह वैक्सीन ड्राइव खुले स्थान पर शुरू करने का सुझाव दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने दायर याचिका को बतौर ज्ञापन स्वीकार कर उसमें दिए तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने को कहा है। अदालत ने कहा कि निर्णय जल्द से जल्द तय नीति के अनुसार लिया जाए।
यह याचिका अमनदीप अग्रवाल ने दायर की है। उन्होंने तर्क रखा है कि मुंबई में वैक्सीन ड्राइव को स्टेडियम व अन्य खुले स्थान पर शुरू किया गया है। इससे लोग एक दूसरे से संपर्क में नहीं आते और सामाजिक दूरी बनाने में सहायता मिलती है। याची की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएस चंडियोक ने कहा कि लॉकडाउन व कर्फ्यू का कोई औचित्य नहीं रह जाता जब लोग वैक्सीन लगाने के लिए लाइन में एक दूसरे मिल कर खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि वैक्सीन को यदि खुले स्थान में लगाने का निर्णय लिया जाता है तो इससे अस्पतालों मेडिकल स्टाफ पर दाब कम होता और वे कोविड मरीजों का उचित तरीके से इलाज कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि महामारी को देखते हुए सभी लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन लगाना जरूरी है।
राजधानी में फिलहाल ऑक्सीजन की किल्लत नहीं है और काफी ऑक्सीजन बेड भी खाली हैं। इसके बावजूद आने वाले दिनों में ऑक्सीजन बेड की संख्या और बढ़ाई जाएगी। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है। वहीं केंद्र सरकार ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन भी बढ़ा दिया गया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने सरकार से कहा कि इन सब मुद्दों के साथ आपको डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करना होगा। इसके अलावा प्लाज्मा डोनेशन पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए नामी-गिरामी लोगों से प्रचार करवाया जाए। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इस समय मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार ने कहा कि हम बेड की समस्या को कुछ ही दिनों में खत्म कर देंगे। हम दिल्ली के हर एक नागरिक को उसके इलाज के लिए बेड मुहैया करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है। आज की तारीख में हर महीने एक करोड़ इंजेक्शन का उत्पादन हो रहा है जो मौजूदा और आगे की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल पर्याप्त है।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोरोना मरीजों के साथ अटेंडेंट को रखने पर विचार होना चाहिए। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां पर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं होता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्लाज्मा डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए मीडिया और नामी-गिरामी हस्तियों की मदद लेनी होगी। जब नामी-गिरामी हस्तियां अपील करती हैं तो उससे लोग जुड़ते हैं। उनसे देश के लिए प्लाज्मा डोनेट करने की अपील करवाएं। आप क्रिकेटर, फिल्म स्टार और राजनीति के क्षेत्रों से जुड़े लोगों की मदद लेकर प्लाज्मा डोनेशन की मुहिम आगे बढ़ाएं।
कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन को ओपन करने के लिए बहुत नियंत्रण और सतर्कता बरतनी होगी, जिससे राज्य आने वाले कोरोना के मामलों से निपट सकें। वकील गौतम नारायण ने कहा कि गलती हमने भी की है हमने भी ढिलाई बरती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने भी एक भूमिका निभाई है, हमने चुनाव कराए और हमने मेला आयोजित किए।