उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में अदालत ने गुरुवार को शरजील इमाम की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। दिल्ली दंगा के मामले में अदालत ने विशेष लोक अभियोजक और बचाव पक्ष के वकील की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
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वहीं, इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम व उमर खालिद सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने तर्क रखा कि दिल्ली दंगों के लिए एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया था और हिंसा भड़काने, सीसीटीवी कैमरों को हटाने और सबूत मिटाने में आरोपियों ने अहम भूमिका निभाई थी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष विशेष अभियोजन अधिकारी अमित प्रसाद ने कहा कि डीपीएसजी ग्रुप के संदेशों से स्पष्ट है कि वे हिंसा की बात करते हैं। उन्होंने कहा विरोध स्थलों को स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना अंतिम रूप दिया गया।
अधिवक्ता प्रसाद ने उमर खालिद, शरजील इमाम, खालिद सैफी, सलीम मलिक, शहाब अहमद और सलीम खान व अन्य की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा मजिस्ट्रेट के सामने गवाह जॉनी द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा गवाह ने दंगो को देखा और आरोपियों के बारे में विस्तृत बयान।