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सीएम रेखा का बयान: 'दंगा आरोपियों की जमानत मांग से देश स्तब्ध, जेएनयू में आतंकवादियों का किया गया समर्थन'

Mon, 12 Jan 2026 04:23 PM IST
राहुल तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जेएनयू में हुए विरोध प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए कहा कि दंगा आरोपियों की जमानत मांग और कथित देश विरोधी नारों से पूरा देश स्तब्ध है। इसे उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।  वहीं उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में बहस, चर्चा, असहमति और यहां तक कि टकराव भी आवश्यक तत्व हैं।
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सीएम रेखा गुप्ता का जेएनयू में प्रदर्शन पर बयान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन जैसी घटनाओं से पूरा देश स्तब्ध है, जहां दंगा आरोपियों की जमानत की मांग की गई और आतंकवादियों का समर्थन किया गया। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों ने अशोभनीय नारे लगाए और देश के खिलाफ बातें कीं। वहीं उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में बहस, चर्चा, असहमति और यहां तक कि टकराव भी आवश्यक तत्व हैं।

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पांच जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कार्यकर्ता और पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत से इनकार करने के बाद कुछ छात्रों ने कथित तौर पर जेएनयू परिसर के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उकसाने वाले नारे लगाए थे।

राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं को बधाई
राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं को बधाई देते हुए, गुप्ता ने कहा कि पूरा देश उनसे उम्मीद करता है क्योंकि राष्ट्र को प्रगति की ओर ले जाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा, पूरा देश जेएनयू जैसी घटनाओं से सदमे में है जहां दंगा आरोपियों की जमानत की मांग की जाती है और आतंकवादियों का समर्थन किया जाता है। देश के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विश्वविद्यालय में छात्र...अशोभनीय नारे लगाते हैं और राष्ट्र के खिलाफ बोलते हैं।

दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर पांच जनवरी के विरोध प्रदर्शन के संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव को उकसाने वाले बयान) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

उपराष्ट्रपति ने बताया स्वस्थ लोकतंत्र में बहस जरूरी
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में बहस, चर्चा, असहमति और यहां तक कि टकराव भी आवश्यक तत्व हैं, लेकिन ऐसी प्रक्रियाओं का अंतिम परिणाम किसी निष्कर्ष पर पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक बार निर्णय लेने के बाद, सुचारू और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए उसके कार्यान्वयन में सहयोग की सामूहिक इच्छा होनी चाहिए।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के नौवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, उन्होंने स्नातक छात्रों से अपने ज्ञान और कौशल को राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित करने का आग्रह किया। स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनके उपदेशों को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा को डिग्री से परे जाकर चरित्र निर्माण, बुद्धि को सुदृढ़ करने और व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम बनाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल शिक्षा और उचित प्रशिक्षण ही भारत के युवाओं को 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को साकार करने में सक्षम बनाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से तीन मुख्य जिम्मेदारियों को निभाने का आग्रह किया - सत्य की खोज में बौद्धिक ईमानदारी, असमानताओं को कम करने के लिए सामाजिक समावेशन, और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय योगदान। उन्होंने उनसे संवैधानिक मूल्यों और भारत के सभ्यतागत लोकाचार द्वारा निर्देशित रहने और हमेशा अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने का आह्वान किया।
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जेएनयू में ऐतिहासिक संकाय भर्ती पूरी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने सोमवार को कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अकादमिक उत्कृष्टता को बहाल किया है, ऐतिहासिक संकाय भर्ती पूरी की है और समावेशी व पारदर्शी पदोन्नति की है। कुलपति ने आगे कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने 70 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड जुटाया है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, पंडित ने कहा कि 1969 में अपनी स्थापना के बाद से, जेएनयू 14 स्कूलों, नौ विशेष केंद्रों और विभिन्न अन्य कार्यक्रमों तक विस्तारित हुआ है। कुलपति ने कहा, विश्वविद्यालय अब 80 पीएचडी कार्यक्रम, 49 मास्टर-स्तरीय कार्यक्रम, 13 स्नातक-स्तरीय कार्यक्रम, सात प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम, तीन डिप्लोमा, एक पीजी (स्नातकोत्तर) डिप्लोमा चलाता है। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान छात्र संख्या लगभग 9,100 है और इस वर्ष, प्रवेश ओवर-सब्सक्राइब हो गए हैं, जिनकी संख्या 3,000 के पार हो गई है।

 
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