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Delhi CJP Protest: 'वर्दी में थे गुंडे, बर्बरता और क्रूरता की हदें पार', दीपके ने घायल समर्थकों से माफी मांगी

Tue, 21 Jul 2026 11:53 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सोमवार को हुए विरोध मार्च के दौरान पुलिस पर "बर्बरता और क्रूरता" का आरोप लगाया। दीपके ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। उन्होंने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
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Delhi CJP Protest - फोटो : ani
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विस्तार
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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारी भारी बारिश, कड़ी सुरक्षा और एक दिन पहले "संसद चलो" मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बावजूद रात भर जंतर-मंतर पर डेरा डाले रहे। मंगलवार सुबह, वॉलंटियर्स ने विरोध स्थल की सफाई की, जबकि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए समर्थकों से माफी मांगी।
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विरोध स्थल के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था बनी हुई थी क्योंकि वॉलंटियर्स को मंच की सफाई करते देखा गया, जो सोमवार को पुलिस द्वारा टेंट और अन्य अस्थायी जगहों को हटाने के बाद एकमात्र खड़ा ढांचा था। यहां तक कि मंच को ढकने वाला टेंट भी फटा हुआ था। युवा समर्थकों के एक समूह ने दीपके को अपने अनुभव बताए, आरोप लगाया कि बिना नाम के टैग वाले पुलिस कर्मियों ने महिलाओं सहित प्रदर्शनकारियों को पीटा और उन्हें "आतंकवादी" कहा। दीपके को हाथ जोड़कर उनसे माफी मांगते देखा गया।
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दिल्ली पुलिस पर बर्बरता का आरोप, CJP ने कहा- वर्दी में गुंडे भरे थे
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सोमवार को हुए विरोध मार्च के दौरान पुलिस पर "बर्बरता और क्रूरता" का आरोप लगाया। दीपके ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। उन्होंने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।

 

दीपके ने मीडिया को बताया कि दिल्ली पुलिस ने बच्चों को बर्बरता से पीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिस अधिकारियों ने 12 साल की लड़कियों के सिर फोड़ दिए। दीपके ने कहा कि उस दिन दिल्ली पुलिस की वर्दी में गुंडे भरे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने युवा प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी की। एक लड़की गर्दन पर लाठी लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई। वह अभी भी RML में गंभीर हालत में है। दीपके ने कहा कि अगर उसे कुछ होता है, तो दिल्ली पुलिस और नरेंद्र मोदी की सरकार जिम्मेदार होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस मार्च रोकने के लिए जल तोप का उपयोग कर सकती थी। दीपके के अनुसार, प्रदर्शनकारी 17-18 साल के बच्चे थे। उन्होंने कहा कि वे एक महीने से शांति से बैठे थे और पहला हमला दिल्ली पुलिस की तरफ से हुआ। पुलिस ने लाठियां चलाईं, जिससे भगदड़ मच गई। दीपके ने विरोध स्थल के पास पत्थरों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए।
 

सुनियोजित घटना के आरोप
दीपके ने आरोप लगाया कि यह घटना दिल्ली पुलिस द्वारा योजनाबद्ध और सुनियोजित थी। उन्होंने पूछा कि पत्थर से भरे ट्रक जंतर-मंतर के आसपास कहां से आए। दीपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस किसी को अंदर नहीं आने दे रही थी। हर सदस्य की तलाशी ली जा रही थी और बैरिकेड्स से सब कुछ बंद था। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इस पर जवाब मांगा। दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में कुछ लोगों को लाठियां दी गईं। उन्होंने दावा किया कि वे लोग पुलिस वाले नहीं थे, बल्कि गुंडे थे जिन्होंने पुलिस की वर्दी पहनी थी।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और CJP की मांगें
दीपके ने बताया कि सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल खत्म करने वाले थे। उनकी भूख हड़ताल का 23वां दिन था। CJP ने उनसे हड़ताल खत्म करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि वांगचुक की जान देश के लिए बहुत कीमती है। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि CJP पीछे नहीं हटेगा। दास ने कहा कि जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध जारी रहेगा।
 

पुलिस के दावे और सरकार से बातचीत
दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि सोमवार के मार्च में 118 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की खबर है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके। उन्होंने बैरिकेड्स तोड़ने और सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ करने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट में FIR दर्ज की है। CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। उनकी मांगों में प्रधान का इस्तीफा, NEET छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और वांगचुक की रिहाई शामिल थी। नड्डा ने कहा कि सरकार को बातचीत का प्रस्ताव मिला है और उन्होंने धरना खत्म करने की अपील की।
 

लाठीचार्ज के विरोध में संसद में धरना
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे पेपर लीक मामले और कल CJP के विरोध मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। आजाद समाज पार्टी - कांशी राम के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद कहते हैं, "हमें दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने पर गर्व है, फिर भी लोकतंत्र में असहमति को लाठियों से दबाया नहीं जा सकता... जंतर-मंतर पर 30 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा है

लोग भूख हड़ताल पर हैं। क्या सरकार उनके मरने का इंतज़ार कर रही थी? कल, जब देश के युवा सड़कों पर उतरे, तो उन पर की गई बर्बरता चौंकाने वाली थी मुझे लगा कि जब युवा सड़कों पर भूखे-प्यासे घूमते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हों, तो मैं चुप नहीं रह सकता। मैंने खुद विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का फैसला किया। मैं उन युवाओं के साथ खड़ा होने के लिए यहां बैठा हूं जो अभी भी विरोध कर रहे हैं, ताकि सरकार और प्रधानमंत्री से उनकी बात सुनने का आग्रह कर सकूं। 

आबादी के 51% हिस्से को कुचलने के बाद आपने क्या सबक सीखा है? वे किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं थे; वे युवा थे, अपनी पढ़ाई कर रहे छात्र थे एक शिक्षित, जागरूक भारतीय नागरिक और सांसद के तौर पर, मैं पूरी रात बाबासाहेब अंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठा रहा और इस लड़ाई को लड़ने की हिम्मत जुटाई। मैंने अभी स्पीकर से बात की है और उन्हें स्थिति के बारे में बताया है, जो कोई भी बातचीत करने को तैयार है, मैं उससे बात करने के लिए तैयार हूं। अगर वे हमें नज़रअंदाज़ करते हैं, तो आंदोलन होगा।

मोदी जी एंटी यूथ हैं, एंटी गरीब हैं और एंटी किसान हैं: प्रियंका
दिल्ली में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "हम इस मुद्दे को काफी समय से उठा रहे हैं ये कोई नया मुद्दा नहीं है लेकिन मुद्दा ये है कि बार-बार ये हो रहा है लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हो रही है मुझे याद है जब मैं यूपी में काम कर रही थी तो जब पेपर लीक हुए थे उसमें सबसे नीचे वाले अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया था और दो दिन के लिए रखा और उसके बाद बात वही रुक जाती है किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 

 
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अभी ये मुद्दा इसलिए ज्वलंत हैं क्योंकि ये देश के युवा है और उनके मां-पाप उन्हें लोन लेकर पढ़ाते हैं ये कितनी मुश्किल परिस्थिति है बच्चा कह रहा है कि क्या मैं संघर्ष ही करता रहूं? ये बहुत गंभीर मामला है इस हल्के में नहीं लिया जा सकता है..आज बच्चे बहुत दुखी हैं....ये सदन ही युवा का है हम सब को उन्होंने ही यहां रखा है...मोदी जी एंटी यूथ हैं, एंटी गरीब हैं और एंटी किसान हैं 12 साल हो गए हैं आप सब देख रहे हैं..बच्चों की आवाज आप सुन लीजिए और मंत्री से इस्तीफा दिलवाए...एक जमाना था जब मंत्री जिम्मेदारी लेते थे..आप भी जिम्मेदारी लीजिए और सिस्टम को दुरूस्त करिए ।
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