- बजट सत्र के पहले दिन उपराज्यपाल ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
- उपमुख्यमंत्री ने पेश किया आउटकम बजट, सरकार के कामकाज का ब्योरा दिया
- मंगलवार को पेश होगा दिल्ली का बजट
- कोविड प्रोटोकॉल का किया पालन, चमोली हादसे व किसान आंदोलन में मृत लोगों की याद में रखा गया मौन
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को विधानसभा में आउट कम बजट पेश किया। सिसोदिया ने कहा कि सरकार ने अपने कुल बजट का 23.2 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया है। सरकार ने कोरोना काल में 10 लाख लोगों को तीन महीने तक रोजाना दिन में दो बार भोजन कराया।
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आपको बता दें कि उपराज्यपाल अनिल बैजल के अभिभाषण के साथ सोमवार को दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हुई। 16 मार्च तक चलने वाले सत्र के पहले दिन उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से रोशनी डाली।
मंगलवार को विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा। सदन ने चमोली हादसे में मृत लोगों व किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की याद में मौन रखा। कोरोना काल में शुरू हुए बजट सत्र में कोविड जांच के बाद ही विधानसभा में प्रवेश की इजाजत मिली। वहीं, सदन के अंदर कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
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सातवीं विधानसभा के दूसरे सत्र में उपराज्यपाल ने सदन को सरकार की शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली-पानी, समाज कल्याण के क्षेत्र में किए गए कामों से अवगत कराया। इन योजनाओं से दिल्लीवालों को सीधा फायदा मिला है।
बैजल ने कहा कि कोविड-19 ने दिल्ली के नागरिकों के जीवन के हर पहलू पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। बावजूद इसके उनकी सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर दिल्ली के नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए निवारण और इलाज सुनिश्चित करने के लिए सभी संसाधन जुटाए।
अनिल बैजल ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के सकल घरेलू उत्पाद में स्थिर कीमतों पर 5.68 प्रतिशत की कमी होने का अनुमान है। इस गिरावट के बावजूद दिल्ली के नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए सरकार ने बिजली सब्सिडी, मुफ्त पानी, महिलाओं व छात्रों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई।
कोरोना महामारी के दौरान 71 लाख लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहला प्लाज्मा बैंक स्थापित किया गया। दिल्ली में मेडिकल सुविधाओं का विस्तार किया गया है। नई खेल सुविधाओं का निर्माण किया गया। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या में वृद्धि की गई।
युवाओं के लिए रोजगार बाजार
दिल्ली विधानसभा बजट के पहले दिन उपराज्यपाल के अभिभाषण के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आउटकम बजट पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण एवं आउटकम बजट 2020-21 की रिपोर्ट सदन में पेश करते हुए विस्तार से सिसोदिया ने बताया। दिसंबर 2020 तक योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं की प्रगति से सदन को अवगत कराया। सदन को यह भी बताया कि आउटकम बजट लाने की जरूरत क्यों पड़ी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चार साल पहले पारदर्शिता लाने के लिए आउटकम बजट की शुरुआत की गई थी। जो शासन प्रणाली का एक अभिन्न अंग है और इससे बजट की पारदर्शिता सामने आती है। आउटकम बजट को अनूठा दस्तावेज बताते हुए कहा कि बजट आवंटन अब औसत दर्जे के आउटपुट और आउटकम संकेतक में विभाजित है, जिन्हें मॉनिटर करना आसान है।
मनीष सिसोदिया ने सदन को आसान शब्दों में आउटकम बजट को समझाया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जांच के लिए मशीन तो खरीद ली जाती है, लेकिन उस मशीन से कितने लोगों का इलाज हुआ इस बात की जानकारी बजट में नहीं होती है। लिहाजा सिर्फ मशीन खरीदने से काम नहीं चलता। सरकार की इस योजना से क्या फायदा हुआ, इसकी बात आउटकम बजट में बताई जाती है। उसमें किन योजनाओं के लिए कितनी राशि आवंटित की गई थी और उन योजनाओं के तहत तैयार किए गए इंडिकेटर्स पर क्या-क्या कार्य किए गए और उनसे जनता को कितना लाभ हुआ। यह सभी आउटकम बजट के जरिए आम जनता को बताया जाता है। इस तरह से आउटकम और आउटपुट दोनों सदन में पेश कर सरकार इस बारे में सदन को हमेशा अवगत कराती रही है।
कोविड की वजह से आर्थिक हालात कमजोर हुई
उपमुख्यमंत्री ने आउटकम बजट पेश करते हुए सदन को बताया कि सरकार हमेशा बजट बनाते हुए बजट में आउटकम और आउटपुट के लिए इंडिकेटर रखती है। कोरोना की वजह से जो वक्त बीता है उससे आर्थिक तंगी रही। बजट खर्च नहीं हुआ। सभी ने अपनी मूल जिम्मेदारी समझकर मजदूरों के हित में काम किया। उन्हें मुफ्त खाना खिलाया गया। इसी बीच सरकारी कार्य भी चलता रहा।
महामारी के दौरान विभागों की ओर से किए गए कार्यों को भी सिसोदिया ने सदन पटल पर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर बेहतर काम किया। वहीं श्रम विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग की बेहतर भूमिका रही। श्रम विभाग और शिक्षा विभाग ने भी कोरोना काल के दौरान लोगों की सेवा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। शिक्षा विभाग ने भी कंटेनमेंट जोन और अस्पतालों के बाहर खड़े होकर बड़े स्तर पर लोगों की सेवा की।
शिक्षा विभाग
मनीष सिसोदिया ने बताया कि कोरोना के दौरान शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया। कोविड पूर्व पूरे साल में 230 कक्षा आयोजित की जाती है। कोविड काल में ऑनलाइन माध्यम से 229 कक्षा छात्रों को दी गई। ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों माध्यम से बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाई। सदन कोअवगत कराया कि दिसंबर 2020 तक 352000 बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला कराया गया।
परिवहन
परिवहन क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की बसों की स्थिति भी सदन में प्रस्तुत की। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जारी होने वाले पीयूसी सर्टिफिकेट को लेकर भी डाटा पेश किया। इस विभाग के आउटकम बजट में कुल 24 कार्यक्रम शामिल किया गया था। इनमे 34 महत्वपूर्ण संकेतक थे। प्रगति रिपोर्ट में 71 प्रतिशत काम को ऑन ट्रैक बताया गया है और 29 प्रतिशत को ऑफ ट्रैक। बताया कि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के कार्य निष्पादन पर असर पड़ा।
पर्यावरण
पर्यावरण विभाग के आउटकम बजट में प्रगति दर्शाने वाली चार्ट में 79 प्रतिशत काम को ऑन ट्रैक दर्शाया गया है तो 15 प्रतिशत को ऑफ ट्रैक। वन विभाग के आउटकम बजट में 77 प्रतिशत काम को ऑन ट्रैक तो 16 प्रतिशत ऑफ ट्रैक बताया गया। इसी तरह लोक निर्माण विभाग जिसमें सड़क व पुल शामिल है का आउटकम बजट 73 प्रतिशत ऑन ट्रैक काम तो 25 प्रतिशत ऑफ ट्रैक बताया गया है। महिला बाल-विकास के मामले में 60 प्रतिशत काम को ऑन ट्रैक तो 30 प्रतिशत को ऑफ ट्रैक बताया गया है। परिवहन के क्षेत्र में 71 प्रतिशत ऑन ट्रैक और 29 प्रतिशत ऑफ ट्रैक कार्य बताया गया है।
पीडब्ल्यूडी
लोक निर्माण विभाग पर ऑउटकम बजट पेश करते हुये बताया कि इसके लिये 37 प्रोजेक्ट रखे गए थे। प्रगति दर्शाने वाली चार्ट में 73 प्रतिशत को ऑन ट्रैक 25 प्रतिशत को ऑफ ट्रैक बताया गया है। वहीं 132000 सीसीटीवी लगाने के लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है। शास्त्री पार्क फ्लाईओवर को आम जनता को समर्पित कर दिया गया है।
जल बोर्ड
दिल्ली जल बोर्ड के लिए बनाई गई इंडिकेटर पर दिसंबर 2020 तक 1571 कॉलोनियों को पानी की पाइप लाइन से जोड़ा गया। प्रगति दर्शाने वाली पाई चार्ट में 62 प्रतिशत कार्य ओ ऑन ट्रैक बताया गया है और 28 प्रतिशत को ऑफ ट्रैक।
विद्युत विभाग
विद्युत विभाग में 15 प्रोजेक्ट शामिल किए गए थे। इनमें 52 मुख्य संकेतक थे। 75 प्रतिशत काम को ऑन ट्रैक बताया गया है और 13 प्रतिशत को ऑफ ट्रैक व 12 प्रतिशत काम के बारे में जानकारी साझा नहीं की गई है। बताया कि सौर ऊर्जा प्लांट से 500 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन हुआ है।