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आदर्श बनी दिल्लीः पीक से पहले वापसी, विशेषज्ञ बोले- उम्मीद से बेहतर हैं परिणाम

Thu, 16 Jul 2020 04:07 AM IST
नोएडा ब्यूरो परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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दिल्ली की अद्भुत वापसी... - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद लगातार स्वस्थ हो रहे मरीजों से दिल्ली की रिकवरी दर तेजी से आगे बढ़ रही है। महामारी और गणितीय मॉडल पर काम करने वाले विशेषज्ञ इसे उम्मीद से ज्यादा बेहतर परिणाम मान रहे हैं। उनका मानना है कि कोरोना पीक से पहले ही दिल्ली की अद्भुत वापसी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ और चिकित्सक इसे दूसरे राज्यों के लिए मॉडल मान रहे हैं।

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वाशिंगटन के थिंक टैंक ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के भारत केंद्र में रिसर्च की पूर्व निदेशक रह चुकीं प्रो शमिका रवि के अनुसार वर्तमान में दिल्ली में बेहतर रिकवरी देखने को मिल रही है। बाकी महानगरों की तुलना करें तो दिल्ली के बाद चेन्नई सबसे बेहतर स्थिति में है। मुंबई की स्थिति में थोड़ा सुधार और बंगलूरू के लिए सतर्क रहने का वक्त नजर आ रहा है।

दिल्ली में अब तक 1.15 लाख, मुंबई में 95 हजार, चेन्नई में 80 हजार और बंगलूरू में करीब 21 हजार कोरोना मरीज मिल चुके हैं। अगर इन चारों शहरों की तुलना की जाए तो दिल्ली और चेन्नई एकमात्र ऐसे महानगर हैं, जहां कोरोना वायरस का ग्राफ एक कर्व (नीचे की ओर) के रूप में दिखाई दे रहा है।
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वहीं, जोधपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर रिजो एम जॉन का कहना है कि अगर पिछले एक महीने की तुलना करें तो राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना वायरस के ग्राफ में बहुत ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिल रहा है। 15 जून को एक दिन में 12 हजार संक्रमित देश भर में मिले थे, जबकि 15 जुलाई को यह आंकड़ा 29 हजार पार कर चुका है। यानी, संक्रमितों की संख्या में करीब दोगुने से ज्यादा वृद्धि हुई है। ठीक इसी अवधि में दिल्ली की स्थिति देखें तो 15 जून को 2224 नए केस सामने आए थे जोकि धीरे धीरे बढ़कर चार हजार तक पहुंच गया था। अब वापस से यह आंकड़ा दो हजार से नीचे आ चुका है। वाकई यह एक विलक्षण वापसी है।

सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि शुरुआत से ही महाराष्ट्र में सबसे गंभीर हालात देखने को मिल रहे हैं, लेकिन दूसरे नंबर पर दिल्ली और तमिलनाडु के बीच एक ऐसी स्थिति मिली थी कि कभी दिल्ली तो कभी तमिलनाडु में ज्यादा मरीज मिल रहे थे। कोरोना के इस ग्राफ को देखते हुए ही इन महानगरों में वायरस का पीक अलग-अलग मिलने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में आए सुधारों ने यह साबित कर दिया कि राजधानी कोरोना वायरस के पीक से पहले ही वापस पटरी पर लौट आई है।

खतरा अब भी बरकरार
एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली ने काफी कम समय में काफी तेजी से रिकवरी की है। यह दूसरे राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि संक्रमण का खतरा टल गया हो। दिल्ली एम्स के ही निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कह चुके हैं कि अब तक के ट्रेंड से स्पष्ट है कि कोरोना वायरस का ग्राफ नीचे जाने के साथ ही दोबारा ऊपर आ सकता है। इसलिए सावधानी जरूरी है। अब तक संक्रमण से बहुत कुछ सीखने को मिल चुका है।

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दिल्ली जैसा संक्रमण कहीं न हुआ कम : स्वास्थ्य मंत्रालय

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण का कहना है कि दिल्ली में संक्रमण को लेकर एक नई तस्वीर देखने को मिली है। एक वक्त था जब दिल्ली में पॉजीटिविटी रेट (रोजाना संक्रमित सैंपल मिलने की दर) 30 फीसदी से भी अधिक थी, लेकिन अब इसमें करीब 20 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। पहले रोजाना सात से आठ हजार औसतन जांच हो रही थी लेकिन फिर यह आंकड़ा 22 हजार तक पहुंचा जिसका नतीजा अब दिखाई दे रहा है।

दिल्ली की एक स्थिति
कुल मरीज 1,15,346
मौत 3446
डिस्चॉर्ज 93,236
सक्रिय मामले 18,664
बदलाव दर (फीसदी में)
रिकवरी : 80.83
संक्रमण ग्रोथ : 01
मृत्यु : 2.9 फीसदी
टीपीआर : 10.23

एक नजर
2 मार्च को दिल्ली में मिला था पहला मरीज
12 मार्च को दिल्ली में कोरोना से हुई थी पहली मौत
शुरुआती 50 मरीजों की मौत हुई थी अप्रैल माह में।
अकेले मई माह में 412 लोगों की हुई थी मौत, जून में आंकड़ा 2,269 पहुंचा
अब रोजाना औसतन 25 लोगों की कोरोना वायरस से हो रही है मौत
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