दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर को अब तक सबसे घातक बताया जा रहा है। रोजाना रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे संक्रमित इसका प्रमाण है। हालांकि, कोरोना की पिछली लहर के मुकाबले इस बार कम लोगों की मौत हो रही है। जिस हिसाब से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। उसके मुकाबले मौत का आंकड़ा काफी कम है। इससे मृत्युदर में भी कोई इजाफा नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार वायरस का बदला स्वरूप काफी तेजी से फैल रहा है, लेकिन यह कम घातक है।
दिल्ली में 28 मार्च से शुरू हई कोरोना की इस चौथी लहर में अब तक 22 दिनों में संक्रमण के कुल 1,97,626 मामले आ चुके हैं,जबकि, कुल 1,114 लोगों की मौत हुई है। इस हिसाब से देखें तो प्रतिदिन औसतन 9 हजार मामले आने पर 50 लोगों की मौत हो रही है।
वहीं, तीसरी लहर के दौरान नवंबर में 22 दिनों में 1,50,123 मामले आए थे, और दो हजार लोगों की मौत हुई थी। यानी, तब प्रतिदिन औसतन सात हजार मामले आने पर ही 90 लोगों की मौत हो रही थी। सितंबर में आई दूसरी लहर में प्रतिदिन औसतन 4400 मामले आने पर ही 53 लोगों की मौत हो रही थी।
इसी प्रकार जून में आई पहली लहर में प्रतिदिन औसतन 3800 मामले आने पर 80 लोग जान गंवा रहे थे। इस लिहाज से देखे तो इस चौथी लहर में संक्रमितों के मुकाबले सबसे कम लोगों की मौत हो रही है। यही कारण है कि दिल्ली में कोरोना से मृत्युदर इस समय पिछली सभी लहरों के मुकाबले सबसे कम है।
एम्स के डॉक्टर विक्रम बताते है कि संक्रमण का नया रूप काफी तेजी से फैल रहा है, हालांकि यह कम घातक है। साथ ही पिछले एक साल से कोरोना मरीजों का इलाज करते हुए डॉक्टरों को काफी अनुभव हो गया है। गंभीर मरीजों का सही समय पर पहचान हो रही है और उनका इलाज किया जा रहा है। फोर्टिस अस्पताल डॉक्टर विनीत तनेजा ने कहा कि इस समय संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं । मौत के मामलों को और कम करने की जरूरत है। इसके लिए सभी पात्र लोगों का जल्द से जल्द टीकाकरण करना होगा।
मृत्यदर में गिरावट के आंकडे( चारों लहर के)
लहर औसतन मामले औसतन मौत मृत्युदर
पहली-(जून) 3800 80 2.98
दूसरी -(सितंबर) 4400 53 1.93
तीसरी- (नवंबर) 7000 90 1.61
चौथी- ( अप्रैल में जारी) 9000 50 1.44
नोट- सभी आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं और 18 अप्रैल तक के हैं।