दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव
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अदालत का फैसला इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा की शहादत को सलाम है। अदालत के फैसले से सच्चाई की जीत हुई है। ये कहना है कि दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव का। संजीव यादव बाउला हाउस एनकाउंटर के समय सहायक पुलिस आयुक्त(एसीपी) थे और बाटला हाउस एनकाउंटर करने वाली इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा के साथ टीम का लीड कर रहे थे।
डीसीपी संजीव यादव का कहना है कि आरिज खान को फांसी मिलने से सच्चाई की जीत हुई है। दिल्ली पुलिस की मेहनत व जांच काम आई। अदालत ने कोर्ट के फैसले की सराहना की है। इससे ये सिद्ध होता है कि दिल्ली पुलिस की जांच बहुत ही अच्छी थी। दिल्ली पुलिस ने वैज्ञानित तरीके से जांच की और सभी तथ्यों को जांच में रखा गया था। स्पेशल सेल के तत्कालीन डीसीपी व दिल्ली पुलिस से रिटायर हो चुके आलोक कुमार का कहना है कि वह कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। दिल्ली पुलिस की जांच अच्छी थी। इस जांच के चलते ही अदालत इस फैसले तक पहुंची।
तत्कालीन डीसीपी रहे आलोक कुमार ने कहा कि अदालत के आज के फैसले से इन सभी प्रश्रों व संशय खारिज हो गए जो लोगों ने बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद खड़े किए थे। इस फैसले से वह एनकाउंटर पर खड़े खड़े करने वाले चुप हो जाएंगे। उम्मीद है कि वह दिल्ली पुलिस के काम व जांच की तारीफ करेंगे।
आज भी मन विचलित हो जाता है
बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान गोली लगने से घायल हुए इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा को सहारा देकर होली फैमिली अस्पताल पहुंचाने वाल तत्कालीन एसआई धर्मेन्द्र ने कहा कि एनकाउंटर को यादव कर आज भी मन विचलित होता है। वह सीन आंखों के सामने से नहीं जाता। उस घटना को याद कर दुख होता है। धर्मेन्द्र कुमार इस समय कश्मीरी गेट थाने के थानाध्यक्ष हैं। हालांकि उन्होंने ज्याद बात करने से मना कर दिया।
कोर्ट ने लोगों को जवाब दे दिया
बाटला हाउस एनकाउंटर में गोली लगने से घायल हुए तत्कालीन हवलदार बलवंत का कहना है कि उन्हें न्याय मिल गया है। कोर्ट ने सवाल खड़े करने वाले लोगों को जवाब दे दिया है।
13 वर्ष साल बाद न्याय मिल गया- माया शर्मा
दोषी आरिज खान को फांसी की सजा सुनाने के बाद शहीद मोहनचंद शर्मा की पत्नी माया शर्मा ने मीडियाकर्मियों से कहा कि आखिरकार उन्हें 13 वर्ष बाद न्याय मिल गया। अभी तक वह वेट एण्ड वॉच की स्थिति में थी। उन्हें न्याय पालिका पर पूरा भरोसा था। अब उन्हें न्याय मिल गया है। वह अदालत का धन्यवाद करती है।