नई दिल्ली। नींद वाले सपने अलग होते हैं, अगर सफल होना है तो जागते हुए सपने देखें। सपने पूरा करने के लिए लगातार काम करते रहें। कचरा गिरा हुआ दिखे या पुराने कपड़ों का ढेर तो उसे समस्या नहीं बल्कि अवसर समझें और समाधान ढूंढें। एनजीओ गूंज के संस्थापक अंशु गुप्ता ने सफलता के यह मंत्र बृहस्पतिवार को सरकारी स्कूल के बच्चों को दिए। उन्होंने सरकारी स्कूलों में आंत्रप्रिन्योरशिप मांइडसेट करिकुलम (ईएमसी) के तहत बच्चों के साथ ऑनलाइन संवाद किया।
मैगसेसे सम्मान प्राप्त अंशु गुप्ता ने कहा कि हम हर वर्ष 6000 टन पुरानी सामग्री को दोबारा उपयोग लायक बना रहे हैं। पुराने कपड़ों, चादरें, फर्नीचर को हमने नई मुद्रा में बदला है। यही सोच उद्यमिता वाली है, इसे बच्चों को सीखना चाहिए। बच्चे किताबों तक सीमित रहने की बजाय समाज से जुड़ने का प्रयास करें। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा को जरूरी बताया। उन्होंने दिल्ली की शिक्षा क्रांति की भी सराहना की।
उन्होंने बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम का आयोजन एससीईआरटी (दिल्ली) की ओर से किया गया। लॉकडाउन के बावजूद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन उद्यमी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उद्यमिता पाठ्यक्रम के माध्यम से नौवीं से बारहवीं तक के बच्चों के भीतर एक नई समझ पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि अंशु गुप्ता किसी पैकेज या खुद के लिए काम नहीं कर रहे, बल्कि अपने काम का आनंद ले रहे हैं। हमारे ईएमसी कोर्स का मकसद यही है कि बच्चों को अपने काम में आनंद लेने योग्य बना सकें। उन्होंने ने संवाद कार्यक्रम को काफी उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि हम ईएमसी से बच्चों में ज्ञान को एक नए नजरिये से देखने की समझ विकसित कर रहे हैं।