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महंगी होने के बाद भी दिल्ली में खूब बिकी शराब, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां

Wed, 06 May 2020 04:19 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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कृष्णा नगर में शराब खरीदने के लिए सुबह 6 बजे से लाइन में खड़े लोग - फोटो : Ashram
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लॉकडाउन-3 में दूसरे दिन शराब की लगभग 150 दुकानें खुलीं। मूल्य दर से शराब 70 प्रतिशत महंगी बिकी, लेकिन शराब का शौक रखने वालों के सामने ये वृद्धि भी फीकी साबित हुई। सुबह 6 बजे से ही शराब की दुकान के सामने लंबी-लंबी लाइनें लग गई और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जिया उड़ गई।

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कोरोना सेस लगाकर शराब की कीमत में वृद्धि करना शराब की दुकानों से भीड़ हटाने के एक तरीके के तौर पर भी देखा जा रहा था, लेकिन बेकाबू भीड़ ने इसे भी धता बता दिया। दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग के सारे पाठ फेल होने के बाद कई जगह पुलिस को हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा, जो पुलिस कोरोना योद्धा बनी हुई थी वहीं पुलिस शराब की बिक्री कराने में जुटी हुई थी।

शराब की जो बोतल 1000 रुपये में मिलती थी उसे मंगलवार को 1700 रुपये कीमत पर भी ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया। हालांकि, सोमवार को लोगो ने स्टॉक कर लिया था, परंतु कई लोग दूसरे दिन भी शराब की दुकानों के बाहर लाइन में लगे हुए थे।
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पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर में तो सुबह 6 बजे से ही लोग लाइन में लग गए थे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हुआ तो पुलिस ने लोगों को खूब दौड़ाया। यहां शराब की दुकान ही नहीं खुली। इसी तरह मुखर्जी नगर, चंद्रनगर, विश्वास नगर में भी कोई दुकान नहीं खुली। लक्ष्मीनगर, मयूर विहार, कोटला, माल रोड, भजनपुरा, मौजपुर में दुकान खुली, लेकिन कुछ घंटे में ही बंद कर दी गईं। ऐसे में कई लोगों को निराश भी होकर घर लौटना पड़ा।

महीने में 700 करोड़ औसत आय का अनुमान
कोरोना सेस 70 प्रतिशत बढ़ने से अनुमान है कि सरकार के खजाने में प्रतिमाह 700 करोड़ रुपया अर्जित होगा। एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली में 100 करोड़ रुपये की शराब हर सप्ताह लोग गटक जाते हैं। कोरोना सेस 70 प्रतिशत बढ़ने से यह आय और अधिक बढ़ जाएगी। इसी तरह महीने में औसतन 425 करोड़ रुपये का शराब दिल्ली वाले पीते हैं।

कोरोना सेस लगने से इसमें भी 70 प्रतिशत की वृद्धि संभव है। हालांकि, दिल्ली में महज 150 दुकानें ही खुल रही हैं। इनमें भी अत्याधिक भीड़ उमड़ने के कारण कई दुकानें बंद हैं तो कुछ दुकानें 2 घंटे में ही बंद हो रही हैं। सरकारी दुकानें ही खुल रही हैं, जबकि प्राइवेट वाइन एंड बियर शॉप बंद की गई हैं। ऐसे में आबकारी विभाग को भी अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है।

सरकार को मिलता है औसतन 5000 करोड़ का रेवेन्यू
औसतन 5000 करोड़ का रेवेन्यू सरकार को प्राप्त होता है। आबकारी टैक्स से वित्तीय वर्ष 2018-19 में 5028 करोड़ रुपया का रेवेन्यू प्राप्त हुआ था। 2019-20 की बात करें तो फरवरी महीने तक 4679 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हुआ था, जबकि बजटीय अनुमान 6000 करोड़ का लगाया गया था। इस बार सरकार को उम्मीद 6.5-7 हजार करोड़ रुपये रेवेन्यू प्राप्त होगा।

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