राष्ट्रीय राजधानी में 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी'के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की गुत्थी सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक नई एफआईआर दर्ज की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस जांच का मुख्य उद्देश्य हिंसा के पीछे की बड़ी साजिश, इसके कथित उकसाने वालों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि क्या यह पूरी घटना पहले से सोची-समझी साजिश थी।
यह नया कानूनी कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब जंतर-मंतर पर सीजेपी द्वारा एक और विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। यह प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होना था। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को होने वाले इस प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और 2,873 संदिग्धों पर नजर
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज 17 एफआईआर रद्द कर दी थीं। हालांकि, केंद्र सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान मौजूद गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की छूट दे दी थी।
क्राइम ब्रांच अब इसी कड़ी में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के जरिए चिन्हित किए गए उन 2,873 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है, जिनकी मौजूदगी विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई थी।
क्या थी 20 जुलाई की घटना?
बीते 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में 'संसद चलो' मार्च निकाला गया था, जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच जमकर झड़पें हुईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और छात्र प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे, साथ ही पुलिस वाहनों समेत सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। प्रदर्शनकारियों ने जहां पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया था, वहीं पुलिस ने इसे कानून और व्यवस्था की गंभीर स्थिति माना। यह आंदोलन मूल रूप से तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था, जो 25 जुलाई को सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद समाप्त हुआ था।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच दल घटनाओं के पूरे क्रम को दोबारा समझने, प्रदर्शन के दौरान और उससे पहले हुए संदेशों के आदान-प्रदान की जांच करने और अपराधियों की सटीक भूमिका तय करने की तैयारी कर रहा है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या सीजेपी द्वारा संसद मार्च के आह्वान के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ बाहरी और आपराधिक तत्व भी शामिल हो गए थे।