नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने तब्लीगी जमात में शामिल 23 विदेशी नागरिकों की ओर से दायर दो याचिकाओं पर मंगलवार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। याचिका में कहा गया कि जब ये विदेशी जमाती निचली अदालत से रिहा होने के बाद अपने घर लौटने लगे तो इन्हें पता लगा कि इनके खिलाफ और प्राथमिकी दर्ज है जिनमें आरोप पत्र भी दायर हो चुका है। इन्होंने सभी एफआईआर रद्द करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली पुलिस से सुनवाई की अगली तारीख 10 अगस्त से पहले जवाब मांगा। पीठ ने पुलिस से कहा कि सभी प्राथमिकियों और निचली अदालत के समक्ष पेश या पेश होने वाले सभी आरोप पत्रों का सारांश पेश करें और वर्तमान स्थिति बताएं।
पीठ को याचिकाकर्ताओं की वकील आशिमा मंडला ने बताया कि सभी 23 विदेशी नागरिकों ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अपना दोष स्वीकार कर समझौता याचिका प्रावधानों के तहत कम दंड की याचना की थी। अदालत ने इन्हें जुर्माना भरने और कोविड-19 लॉकडाउन के उल्लंघन जैसे छोटे मामलों में दोष स्वीकार करने के बाद छोड़ दिया था।
अदालत ने उन्हें उनके देश वापस भेजने के आदेश भी जारी किए गए थे, लेकिन विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकियों के लंबित होने के कारण ये विदेशी नागरिक अपने घर नहीं जा पा रहे हैं। इन पर अवैध रूप से तब्लीगी जमात में शामिल होने, वीजा नियमों का उल्लंघन और कोविड-19 पर सरकारी आदेश के उल्लंघन का आरोप है। ये 23 याचिकाकर्ता ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और श्रीलंका के नागरिक हैं।