नई दिल्ली। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं कि हिजबुल मुजाहिदीन के चार कथित सदस्यों ने जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान से धन प्राप्त किया था। अदालत ने कहा कि इन चारों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय करने आदेश दिया है।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने अपने फैसले में कहा इस मामले में हिजबुल कमांडर सैयद सलाउद्दीन भी शामिल है। आतंकी संगठन ने जम्मू कश्मीर एफेक्टीज रिलीफ ट्रस्ट (जेकेएआरटी) के नाम से एक फ्रंटल संगठन बनाया और इस ट्रस्ट का उद्देश्य आतंकवादी गतिविधियों को फंड देना और मुख्य रूप से आतंकवादियों और उनके परिवारों के लिए धन उपलब्ध कराना था।
अदालत ने व्यापक साजिश में शामिल होने लेकर मोहम्मद शफी शाह, तालिब लाली, मुजफ्फर अहमद डार और मुस्ताक अहमद लोन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और 121 ए (भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। उन पर गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के आतंकवाद से जुड़े प्रावधान भी लगाए गए हैं।
अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि जेकेएआरटी हिजबुल का फ्रंटल संगठन है। गवाहों के बयानों से यह भी स्पष्ट है कि इसका नियंत्रण व परिचालन (जेकेआरआरटी का) सैयद सलाउद्दीन के पास है। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के प्रभावितों के लिए राहत की आड़ में धन जुटाना था।
अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से यह भी स्पष्ट है कि यह धन पाकिस्तान की आईएसआई सहित विभिन्न व्यक्तियों, संगठनों और देशों द्वारा जुटाया गया है। धन का उपयोग हिजबुल की आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया था। इस धन का उपयोग घायल, गिरफ्तार आतंकवादियों और मारे गए आतंकवादियों के परिवारों के लिए भी किया गया था।
अदालत ने कहा कि इन निधियों का उपयोग सामान्य स्थापना, हथियारों और गोला-बारूद की खरीद, राशन, कपड़े, प्रशिक्षण शिविरों आदि पर होने वाले खर्च के लिए भी किया गया था। स्पष्ट है कि यह सब भारत सरकार के खिलाफ युद्ध व आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं।