28 जनवरी को जारी आदेश में अदालत ने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं यह पाता हूं कि अभियोजन पक्ष के गवाह (पीडब्ल्यू2 कांस्टेबल पीयूष) की एकमात्र गवाही पर भरोसा करना अत्यंत असुरक्षित होगा। इसलिए, यह निष्कर्ष निकाला है कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा है और आरोपी संदेह के लाभ का हकदार है।
फैजान पर आरोप था कि वह 25 फरवरी 2020 को कथित रूप से स्कूल में तोड़फोड़ करने और आग लगाने वाली दंगाई भीड़ का हिस्सा था, जिससे एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। अभियोजन पक्ष का दावा था कि करीब 200 लोगों ने जबरन परिसर में प्रवेश किया, संपत्ति और वाहनों को नुकसान पहुंचाया और इमारत में आग लगा दी।
इस मामले में शुरुआत में फैजान सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उसके दो सह-आरोपियों को फरवरी 2025 में बरी कर दिया गया था। फैजान को 2022 में फरार होने के बाद घोषित अपराधी घोषित किया गया था। उसे अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ अलग से मुकदमा चला।
अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में हुई अस्पष्टीकृत देरी और जांच एजेंसी द्वारा मौके पर कथित रूप से मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की जांच न किए जाने का भी उल्लेख किया अदालत ने कहा कि इन विरोधाभासों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, और जोड़ा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा है इसलिए, अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।