इसी तरह चौथी लहर के पीक वाले दिन यानी 20 अप्रैल को एक दिन में 28,390 लोग कोरोना संक्रमित मिले थे। हालांकि संक्रमण दर का पीक 22 अप्रैल 2021 को देखने को मिला जब एक दिन में 36.20 फीसदी तक सैंपल संक्रमित मिले। इसके बाद दैनिक मामले और संक्रमण दर में लगातार गिरावट ही देखने को मिली थी। पिछले एक दिन की स्थिति देखें तो दिल्ली में 27,561 लोग संक्रमित मिले हैं। वहीं संक्रमण दर 26.22 फीसदी तक पहुंच गई है।
इस बार संक्रमण का उछाल बहुत ज्यादा
हालांकि, इन दो लहर की आपस में तुलना करें तो कोरोना संक्रमण का असर इस बार काफी अलग दिखाई दे रहा है। न तो ऑक्सीजन का संकट देखने को मिल रहा है और न ही अस्पतालों में बिस्तरों का अभाव है। दवा बाजार में भी संक्रमण को लेकर बहुत अधिक मांग या कालाबाजारी देखने को नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग का यह भी कहना है कि इस बार संक्रमण का उछाल बहुत है। यह तेजी से फैल रहा है, जिसकी वजह ओमिक्रॉन वेरिएंट हो सकता है। इस उछाल की वजह से दैनिक संक्रमण दर, संक्रमित मरीजों की संख्या, सक्रिय मामले और कंटेनमेंट जोन तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। जन स्वास्थ्य के लिहाज से इस स्थिति को भी गंभीर श्रेणी में ही माना जाता है।
सबसे ज्यादा जोखिम वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं को
लोकनायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि संक्रमण के फैलने से सबसे बड़ा जोखिम वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं में होता है। साथ ही इस बात की आशंका भी बढ़ जाती है कि कहीं एक रोगी में एक से अधिक वेरिएंट मिलकर कोई हायब्रिड इम्युनिटी नहीं बना दें। अगर ऐसा होता है तो यह एक नई परेशानी खड़ा कर सकता है। दरअसल हायब्रिड इम्युनिटी का मतलब है कि एक व्यक्ति में दो तरह से किसी एक संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी का विकसित होना। जैसे एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित हुआ, ठीक होने के बाद उसके शरीर में एंटीबॉडी विकसित हुईं। इसके बाद उक्त मरीज ने वैक्सीन की दोनों खुराक ले लीं जिससे फिर एंटीबॉडी विकसित हुई हैं। अब वह व्यक्ति फिर से कोरोना की चपेट में आता है तो फिर उसके शरीर में एंटीबॉडी बनेंगीं।
आशंका इसकी भी है कि एक मरीज में पहले डेल्टा हुआ फिर ओमिक्रॉन या फिर डेल्टा और ओमिक्रॉन एकसाथ किसी मरीज में है तो वायरस के म्यूटेशन फिर से हो सकते हैं। इसीलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ दिल्ली के लिए इस वक्त गंभीर हालात मान रहे हैं फिर चाहे अस्पतालों में भर्ती रोगियों की दर स्थिर हो।