राजधानी में कोरोना का ग्राफ करीब 28 दिनों से स्थिर है। दैनिक मामले 100 से नीचे हैं और संक्रमण दर भी 0.50 प्रतिशत से कम बनी हुई है। देशभर में भी कोरोना के हालातों को देखें तो अन्य बड़े राज्यों की तुलना में दिल्ली में स्थिति सबसे बेहतर है। इस समय देश में संक्रमण के जितने मामले आ रहे हैं उनमें दिल्ली के महज 0.10 फीसदी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में करीब चार सप्ताह से संक्रमण बेदम है, लेकिन अन्य राज्यों में संक्रमितों का बढ़ना चिंता की बात है। अब लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
दिल्ली में पिछले चार सप्ताह में कुल 1796 मामले आए और 59 मरीजों की मौत हुई। लिहाजा, रोजाना औसतन 65 संक्रमित मिले और दो मौत हुई हैं। इस साल ऐसा पहली बार है कि जब करीब चार सप्ताह तक नए मामले औसतन 70 से नीचे हैं। सक्रिय मरीज भी 550 से 600 के बीच बने हुए हैं। रोजाना करीब 75 हजार जांच पर भी संक्रमण दर 0.50 फीसदी से नीचे बनी हुई है। यह सभी आंकड़े बताते हैं की लंबे समय बाद कोरोना से हालात इतने बेहतर हुए हैं।
इन चार कारणों से ‘बेदम’ हुआ वायरस
एम्स के डॉक्टर युद्धवीर सिंह बताते हैं कि दिल्ली में कोरोना के काबू में रहने के चार कारण हैं। पहला यह है कि दूसरी लहर में करीब 80 फीसदी आबादी संक्रमित हो चुकी है। इन सभी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है। दूसरा यह है कि अभी यहां कोरोना का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है।
इससे संक्रमण नहीं फैल रहा है। तीसरा यह है कि लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। चौथा कारण यह है कि सरकार जांच, ट्रैक, आइसोलेट और वैक्सीनेशन की नीति को प्रभावी रूप से लागू कर रही है। सही समय पर लोगों की जांच कर उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है और अधिक से अधिक टीकाकरण हो रहा है।
दक्षिण भारत में बढ़ रहे मामले खतरे का संकेत
फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर विकास मौर्या के मुताबिक, वायरस फिलहाल काबू में है, लेकिन इसी तरह नियमों का पालन करने की जरूरत है। अगर लापरवाही बरती गई तो अगले कुछ सप्ताह में कोरोना के मामले फिर बढ़ सकते हैं। अभी यह समझना होगा कि वायरस का प्रसार कम हुआ है, खत्म नहीं हुआ है। जितनी अधिक सावधानी बरती जाएगी तीसरी लहर के खतरे को उतना ही कम किया जा सकेगा। दक्षिण भारत के कई राज्यों में मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में वहां से दिल्ली में भी संक्रमण का प्रसार हो सकता है। लोगों को बेवजह भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए।