इसको देखते हुए इन अस्पतालों में रूटीन सर्जरी के साथ-साथ अन्य गंभीर मरीजों का भी इलाज शुरू किया जा रहा है। कोविड के मामले कम होने के बाद अब पोस्ट कोविड समस्याओं के मरीज भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। जो मरीज भर्ती हैं, उनमें अन्य गंभीर रोगों के अलावा पोस्ट कोविड वाले ही मरीज हैं।
अधिक सतर्क रहने की जरूरत
वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर कमलजीत सिंह कैंथ बताते हैं कि लंबे लॉकडाउन और कोरोना से बचाव के नियमों के पालन से दिल्ली में कोरोना से हालात नियंत्रण में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वायरस का प्रसार तो अब थम गया है, लेकिन तीसरी लहर का खतरा भी है। इसलिए जरूरी है कि लोग नियमों का पालन करें, क्योकि वायरस के बदलने पर किसी का नियंत्रण नहीं है, लेकिन उससे बचाव करना लोगों के हाथ में हैं। अब लापरवाही बरती तो परिणाम घातक हो सकते हैं।
दो बड़े सरकारी अस्पतालों में 30 फीसदी मरीज
दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पताल लोकनायक और जीटीबी में मिलाकर 350 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इस लिहाज से देखें तो कुल मरीजों में से 30 फीसदी का इलाज इन्हीं दोनों अस्पतालों में चल रहा है।
- सरदार पटेल कोविड केंद्र
- इंदिरा गांधी अस्पताल(द्वारका)
- जनकपुरी सुपरस्पेशयलिटी अस्पताल
- आचार्य भिक्षु अस्पताल
- ईएसआई अस्पताल( झिलमिल)
- विम्हंस अस्पताल
- बालाजी अस्पताल( पश्चिम विहार)
- महाराजा अग्रसेन अस्पताल(पंजाबी बाग)
- मैक्स( पटपडगंज)
- सर गंगाराम सिटी अस्पताल
- फोर्टिस( ओखला)
- फोर्टिस( शालीमार बाग)
- पार्क अस्पताल
- पुष्पावती अस्पताल
- बत्रा अस्पताल
- कालरा अस्पताल
- सत्यभामा अस्पताल
- सरोज अस्पताल
- दिल्ली हर्ट एवं लंग्स इस्टीट्यूट
- कुकरेजा अस्पताल
- मधुकर अस्पताल
- सिग्नस अस्पताल
- तीर्थ राम अस्पताल
- शांति मुकुंद अस्पताल
- आयुष्मान अस्पताल
- धर्मशिला अस्पताल
- संत परमानंद अस्पताल
- मूलचंद अस्पताल
- गोयल अस्पताल
- मेट्रो अस्पताल
- रिवाइव अस्पताल
- मेडस्टार अस्पताल
- ब्रहम शक्ति अस्पताल
- आर्य अस्पताल
- सुशीला अस्पताल
- महाराजा अग्रसेन अस्पताल( द्वारका)
- भगवान महावीर अस्पताल
- पुष्पांजलि अस्पताल
- पंचशील अस्पताल
- दिल्ली मेडकिल सेंटर
(इनके अलावा 5 बेड की क्षमता वाले 10 और अस्पतालों में भी कोई मरीज नहीं है)
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नोट- आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं