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Cycle Tracks Delhi : सड़कों पर गाड़ियां...ट्रैक पर झाड़ियां, जाएं तो कहां, अतिक्रमण ने किया बंटाधार

Sat, 04 Jun 2022 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा सर्वेश कुमार, नई दिल्ली

सार

अतिक्रमण व अवैध पार्किंग से भी ट्रैक को नहीं बचाया जा सका है। दिल्ली में साइकिल से सफर करने वालों को रोजाना मंजिल तक पहुंचने के लिए तमाम परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।
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मथुरा रोड, दिल्ली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सड़क पर गाड़ियों की भरमार और साइकिल ट्रैक पर उगी झाड़ियां। अतिक्रमण व अवैध पार्किंग से भी ट्रैक को नहीं बचाया जा सका है। दिल्ली में साइकिल से सफर करने वालों को रोजाना मंजिल तक पहुंचने के लिए तमाम परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। राजधानी में 250 किलोमीटर के दायरे में बने साइकिल ट्रैक पर अतिक्रमण और रुकावटें होने की वजह से साइकिल को आगे बढ़ने में परेशानी आ रही है। मौजूदा स्थिति बयां करती है कि साइकिलों के ट्रैक पर लौटने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

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मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के गेट नंबर-5 के पास साइकिल ट्रैक पर घास और झाड़ियां उगने से यहां साइकिल का चलना मुश्किल हो गया है। सड़कों पर हजारों की संख्या में वाहनों का काफिला गुजरता रहता है। साइकिल के लिए अलग लेन न होने से सड़क पर चलना भी सुरक्षित नहीं है। कई बार सड़कों पर साइकिल चालक दुर्घटना का भी शिकार हो चुके हैं।

आईटीओ के नजदीक साइकिल ट्रैक तो है, लेकिन उसमें प्रवेश कैसे करें। वहां दुपहिया वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए सीमेंट के पिलर लगाए गए हैं। ऐसे में साइकिल चलाना भी मुश्किल हो गया है। मुख्य सड़क पर उतरे तो आगे-पीछे चलने वाले तेज रफ्तार वाहनों से बीच से बचते हुए आगे निकलने की रोजाना चुनौती रहती है। कई जगह ट्रैक पर बैरिकेड रख दिए जाने के कारण चालक को साइकिल ट्रैक को छोड़ मुख्य सड़क पर चलने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। मुख्य सड़क पर साइकिल के चलने की सुविधा नहीं तो साइकिल ट्रैक पर जगह नहीं। साइकिल चालकों का सवाल है कि इन परेशानियां के बीच साइकिल से आखिरकार जाएं तो जाएं कहां। 
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अक्षरधाम के नजदीक भी साइकिल ट्रैक के पास कार और दुपहिया वाहन पार्क कर दिए जाते हैं। इस वजह से साइकिल चालकों को सड़क पर चलना पड़ता है। साइकिल चालकों को हो रही इस तरह की परेशानी को दूर करने के लिए विभागों की तरफ से भी अभी तक न तो माकूल सुविधा है और न ही सुरक्षित सफर का मौका देने के लिए इंतजाम।

साइकिल लेन से बढ़ेगी सुरक्षा
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सड़कों पर बस लेन के नजदीक ही साइकिल के लिए अलग जगह निर्धारित करने की जरूरत है। साइकिल की रफ्तार धीमी होने के कारण बायीं लेन में ही चल सकती है। बस समेत दूसरे वाहनों के बोझ के कारण साइकिल का चलना मुश्किल हो जाता है। 

बनाए जाएं नियम
एशियन साइक्लिंग फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी ओंकार सिंह ने कहा कि दिल्ली के द्वारका सहित कई जगहों पर साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं। दूसरे वाहनों की तरह साइकिल के लिए भी नियम बनाए जाने चाहिए। अलग ट्रैक होने के बावजूद अक्सर शाम के वक्त साइकिल और स्कूटर चालक साइकिल ट्रैक पर चलने लगते हैं। उन्हें भी रोकने की जरूरत है।

सहूलियत और रियायत से बढ़ेंगी साइकिल चालकों की संख्या
ओंकार सिंह ने कोपनहेगन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 62 फीसदी लोग साइकिल से चलते हैं। ट्रैफिक सिग्नल पर भी पहले साइकिल को रुकने दिया जाता है। मॉल्स में खरीदारी पर 20 फीसदी तक की छूट और दफ्तरों में साइकिल से पहुंचने वालों को भी रियायत दी जाती है। साइकिल को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि देश में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने के साथ रियायतें दी जाएं। 

अलग लेन से सुरक्षा पर नहीं मंडराएगा खतरा
सुरक्षित साइक्लिंग के लिए बुनियादी ढांचे को बेहतर कर सभी आयु वर्ग समूहों में इसे बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए साइकिल चलाने के लिए एक नेटवर्क का होना जरूरी है, ताकि रास्ते में कोई रुकावट न रहे। साइकिल के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया करने की राह में अवैध पार्किंग, साइकिल लेन पर अतिक्रमण शामिल हैं। इस वजह से सड़कों पर चलना, चालकों की सुरक्षा के लिए खतरा है।    - उदित अग्रवाल, प्रोग्राम मैनेजर, ग्लोबल डिजाइनिंग सिटीज इनिशिएटिव, ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल रोड सेफ्टी के भागीदार

सालाना होती है औसतन 40-50 मौतें
हर साल दिल्ली की सड़कों पर सालाना साइकिल से चलने वाले करीब 40-50 लोगों की मौतें हो रही हैं, जबकि 2019 में यह आंकड़ा 36 था और 2020 में 48 मौतें हुईं थीं। पिछले पांच साल में करीब 250 लोग दम तोड़ चुके हैं।

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