दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने मेट्रो स्टेशनों से यात्रियों के घर और दफ्तर तक की यात्रा को आसान बनाने के लिए लास्ट-माइल कनेक्टिविटी नेटवर्क पर काम शुरू कर दिया है। ई-ऑटो, बाइक टैक्सी, ई-रिक्शा और पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग जैसी सेवाओं का उपयोग अब रोजाना करीब 92 हजार यात्री कर रहे हैं। डीएमआरसी का लक्ष्य आने वाले समय में यात्रियों को उनकी जरूरत और बजट के अनुसार अधिक सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल कराना है।
डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने बताया कि मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने और वहां से आगे जाने की सुविधा अभी भी बड़ी चुनौती है। इसे बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि निगम यात्रियों को परिवहन विकल्पों का गुलदस्ता देना चाहता है, ताकि लोग अपनी सुविधा और खर्च के हिसाब से साधन चुन सकें।
30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन 91,987 यात्री लास्ट-माइल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। इनमें 55,580 यात्री ई-ऑटो सेवाओं का लाभ ले रहे हैं, जबकि 30,442 यात्री बाइक टैक्सी और पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा 5,965 लोग ई-रिक्शा से यात्रा कर रहे हैं। फिलहाल डीएमआरसी नेटवर्क में 1,507 ई-ऑटो संचालित हो रहे हैं और मार्च 2027 तक चरणबद्ध तरीके से 316 नए ई-ऑटो और जोड़े जाएंगे।
निगम ने 14 मेट्रो स्टेशनों पर ई-रिक्शा के लिए बैटरी-स्वैपिंग सुविधा भी शुरू की है। इनमें रिठाला मेट्रो स्टेशन, राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन, बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन और वैशाली मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। मेट्रो ने रैपीडो, उबर और भारत टैक्सी जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की है। वहीं, दिल्ली परिवहन निगम की फीडर बसें भी मेट्रो यात्रियों की सुविधा बढ़ा रही हैं। मेट्रो अब मेट्रो स्टेशनों के बाहर ऑटो, बस और निजी वाहनों के लिए अलग पिक-अप और ड्रॉप जोन विकसित कर रहा है, ताकि ट्रैफिक जाम कम हो और यात्रियों को अधिक सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।