दिल्ली सरकार ने बुधवार को जल बोर्ड में कार्यरत 700 संविदा कर्मचारियों को नियमित किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस निर्णय को ऐतिहासिक करार देते हुए दावा किया कि देश में यह पहली बार हुआ है, जब एक साथ इतने संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी मिली है।
इतना ही नहीं, दिल्ली राज्य बनने के बाद इतने बड़े स्तर पर कच्चे कर्मचारियों को कभी पक्का नहीं किया गया। अब पूरे देश में यह मांग उठेगी कि जब दिल्ली में हो सकता है, तो उनके यहां क्यों नहीं हो सकता? मुख्यमंत्री ने कहा कि जो कहा, सो किया। एक और वादा पूरा किया। दिल्ली जल बोर्ड में ठेके पर काम करने वाले 700 कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया गया। वह सभी बहुत खुश हैं। उनका सपना पूरा हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी मंशा दिल्ली सरकार के सभी विभागों के कच्चे कर्मचारी पक्के करने की है, लेकिन हमारे पास अधिकार बहुत कम है। केंद्र सरकार के पास दिल्ली के बहुत सारे अधिकार हैं। इस बारे में केंद्र सरकार से बात की जाएगी। वहीं, उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों को नियमित करने के पीछे तर्क दिया कि बोर्ड एक स्वायत्त संस्था है। यहां पर बोर्ड सारे निर्णय लेता है। केंद्र सरकार की इसमें कोई दखलंदाजी नहीं होती है।
सरकारी कर्मचारियों की समस्याएं दूर करेंगे : केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश में कर्मचारियों को पक्का करने के पक्ष में माहौल नहीं है। कहा जाता है कि कर्मचारियों को पक्का कर दो तो वो काम नहीं करते हैं। फिर वो आलसी हो जाते हैं। दिल्ली में स्कूल अच्छे करने व शिक्षा क्रांति लाने में सरकारी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने ही काम किया। सरकारी अस्पताल बहुत शानदार हो गए हैं। यह कार्य भी सरकारी डॉक्टरों और नर्सों ने ही किया। अगर हम सरकारी कर्मचारियों की समस्याओं को अच्छे से दूर करेंगे तो सरकारी कर्मचारी अच्छा काम करते हैं।
शिक्षा-स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और अब हमारी सरकार के करीब सात साल हो गए हैं। इन सात वर्षों में हमने ढेर सारे काम किए। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी समेत कई क्षेत्रों के अंदर हमने काम किए और उन सभी कामों की पूरे देश में भी आज चर्चा हो रही है और दुनिया में भी चर्चा हो रही है।
स्कूल-अस्पताल नहीं चला पाने वाली सरकार न हो
केजरीवाल ने कहा कि जब हमारी सरकार बनी थी, तब सरकारी स्कूलों की बहुत बुरी हालत थी। पूरे देश में यह माहौल था कि सरकारी स्कूल अब बंद करो, लेकिन हमने साबित कर दिया है कि सरकार अगर चाहे और सरकार ईमानदार हो तो वह स्कूल और अस्पताल भी चला सकती है। जो सरकार स्कूल और अस्पताल नहीं चला पाए तो फिर उस सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।