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भीड़ में बदला आंदोलन: न रहा कोई नेता न कोई निर्देश, सबकी अपनी चली; पहले से कमजोर तैयारी ने बढ़ाई अव्यवस्था

Tue, 21 Jul 2026 05:11 AM IST
Digvijay Singh धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली के जंतर मंतर से निकलते ही संसद मार्च का आंदोलन भीड़ में तब्दील हो गया। इसके बाद इनका न कोई नेता रहा और न ही किसी के निर्देश पर वहां पहुंचे। सहूलियत के हिसाब से प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे।
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सीजेपी प्रोटेस्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नई दिल्ली के जंतर मंतर से निकलते ही संसद मार्च का आंदोलन भीड़ में तब्दील हो गया। इसके बाद इनका न कोई नेता रहा और न ही किसी के निर्देश पर वहां पहुंचे। सहूलियत के हिसाब से प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। जिसको जिस दिशा में खुला रास्ता में दिखा, वह उसी दिशा में चले गए। वहीं, सबसे बड़ा समूह संसद मार्ग की तरफ बढ़ता रहा। 

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भारी भीड़ के बीच यह लोग एक के बाद बैरीकेड लांघते हुए यह संसद भवन की दहलीज तक जा पहुंचे। इस दौरान जगह-जगह पर इनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई। लाठीचार्ज, पत्थरबाजी व आंसू गैस के गोले भी चले। जानकारों का मानना है कि पहले से कमजोर संगठनात्मक तैयारी ने अव्यवस्था बढ़ा दी। नेतृत्व के स्तर पर बड़ी संख्या में संसद मार्च के लिए जुटे प्रदर्शनकारियों के बीच तालमेल बिठाने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था। सोशल मीडिया से जन्मी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में एक बार इंटरनेट बंद होने से धराशायी हो गई। यहां तक कि मोबाइल से आंदोलन का बुनियादी संदेश तक पहुंचा पाना नेताओं के लिए मुमकिन नहीं हुआ। 

कई समूहों में बंटे प्रदर्शनकारी
नेतृत्व से संपर्क टूटते ही प्रदर्शनकारी अलग-अलग बड़े समूहों में बंट गए। हर समूह अपनी-अपनी समझ और स्थानीय नेतृत्व के आधार पर आगे बढ़ने लगा। किसी समूह ने संसद मार्ग की ओर बढ़ने का प्रयास किया तो कुछ लोग जनपथ और आसपास के अन्य रास्तों से आगे निकलने की कोशिश करते रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि पुलिस को भी अलग-अलग स्थानों पर इन समूहों को रोकना पड़ा। दिनभर नई दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग समय पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं हुई। यदि सभी समूह एक केंद्रीय रणनीति के तहत आगे बढ़ते तो पुलिस का सामना भी एक ही स्थान पर होता, लेकिन बिखरे हुए आंदोलन के कारण टकराव कई जगहों पर देखने को मिला।
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एक बार बिछड़ने पर दिन भर रहे अकेले 
जंतर-मंतर पहुंचे कई प्रदर्शनकारी अपने-अपने समूहों से बिछड़ गए। कोई अपने जिला या राज्य के साथियों को तलाश रहा था तो कोई यह जानने की कोशिश कर रहा था कि नेतृत्व आखिर किस स्थान पर मौजूद है। कई लोग लगातार मोबाइल पर संदेश आने का इंतजार करते रहे, लेकिन इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण न तो व्हाट्सएप समूहों पर कोई नई सूचना पहुंच रही थी और न ही सोशल मीडिया के जरिए कोई दिशा-निर्देश मिल पा रहा था। जिन लोगों को पहले से तय योजना की जानकारी नहीं थी, वे सबसे ज्यादा असमंजस में दिखाई दिए। देर शाम इंटरनेट शुरू होने के बाद ही इनका संपर्क अपने परिचितों से हो सका।

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