दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए गाजियाबाद से सटे दिल्ली बॉर्डर पर शनिवार को दिनभर पुलिस का पहरा रहा। दिल्ली की ओर जाने वाले 15 से अधिक प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की सघन जांच की गई। प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका के चलते 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।
वहीं नोएडा सुबह प्रदर्शनकारियों के दिल्ली प्रवेश से पहले बॉर्डर पर पुलिस की निगाहें रहीं। वाहन में यूनियन का झंडा लगे वाहनों को वापस किया गया, सघन चेकिंग के बाद ही वाहनों को दिल्ली में प्रवेश मिला। पुलिस ने दूसरे दिन भी शहरभर में दो दर्जन से ज्यादा लोगों को घर पर ही नजरबंद रखा।
उधर, फरीदाबाद पुलिस ने बदरपुर बॉर्डर समेत दिल्ली की सभी सीमाओं पर नाकेबंदी की। चेकिंग की वजह से शनिवार सुबह बदरपुर बॉर्डर पर एक किलोमीटर तक ट्रैफिक रेंगता नजर आया। इससे वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ी।
वहीं गुरुग्राम पुलिस द्वारा बॉर्डरों पर भारी नाकेबंदी और संदिग्ध वाहनों की जांच के चलते सरहौल बॉर्डर पर दो किमी लंबा जाम लग गया। सोनीपत में कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली में प्रवेश से पहले वाहनों की सघन जांच के चलते यातायात की रफ्तार थम गई।
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कुंडली बॉर्डर पर वाटर कैनन, आंसू गैस, दमकल और एंबुलेंस की गाड़ियां तैनात की गईं। वहीं, शनिवार को बहादुरगढ़ में पुलिस ने टिकरी बॉर्डर, झाड़ौदा बॉर्डर, यूईआर-2, रोहद टोल प्लाजा, ढांसा बॉर्डर और कानोंदा से दिल्ली जाने वाले रास्तों पर नाके लगाए। यहां संदिग्ध वाहनों और बसों की जांच के साथ यात्रियों की तलाशी भी ली गई।
दिनभर धरपकड़, दिल्ली हलाकान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर धरपकड़ की। प्रदर्शनकारियों को शनिवार को जंतर-मंतर पर पहुंचने से पहले ही जगह-जगह रोककर हिरासत में लेते रहे।
पुलिस सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों-गाड़ियों में भरकर स्टेडियमों और अस्थायी हिरासत केंद्र ले गई। हालांकि देर रात सभी को छोड़ दिया गया। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके समेत तीन नेताओं को विमान से ही हिरासत में ले लिया गया। इनके अलावा चार पूर्व मुख्यमंत्रियों दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, प. बंगाल की ममता बनर्जी, त्रिपुरा के माणिक सरकार और केरल के पी. विजयन भी हिरासत में लिए गए।
दिल्ली में करीब 45 हजार जवानों की सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और पाबंदियों के चलते प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सके। हालांकि बॉर्डर पर चेकिंग से ट्रैफिक चोक हो गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों से झड़प भी हुई। आरोप है कि पुलिस पर हुए पथराव में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस बीच, कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने 12 अक्तूबर को बड़े प्रदर्शन का एलान किया है।
पुलिस ने हिरासत में लिए सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ने की बात कही है। हालांकि, सीजेपी ने दावा किया है कि हिरासत में लेने के बाद दिपके, रांका और सौरव दास कहां हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। सीजेपी के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि उसके कार्यकर्ता रविवार सुबह फिर जंतर-मंतर की ओर कूच करेंगे।
भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
आंतरिक मामलों में यूएन की टिप्पणी अनुचित हस्तक्षेप
प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की ओर से चिंता जताने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन ने यूएन की टिप्पणी खारिज करते हुए इसे अनुचित और भारत के आंतरिक मामलों में अवांछित हस्तक्षेप करार दिया है। यूएन प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने हिरासत पर चिंता जताते हुए सभी नेताओं की तत्काल रिहाई की अपील की थी।
सुप्रीम आदेश की अवमानना के आरोप पर आज होगी सुनवाई
सीजेपी के प्रदर्शन के चलते मेट्रो-ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बाधित नहीं करने के आदेश की अवमानना के आरोप वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट रविवार को सुनवाई करेगा। सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची व जस्टिस वी मोहना की पीठ करेगी।
जंतर-मंतर की ओर आज फिर सीजेपी का कूच
पुलिस ने हिरासत में लिए सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ने की बात कही है। हालांकि, सीजेपी ने दावा किया है कि हिरासत में लेने के बाद दिपके, रांका और सौरव दास कहां हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।