नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की हवा खराब होने के साथ ही प्रदूषण पर सियासत भी गरमाने लगी है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही केंद्र से सख्त कदम उठाने की मांग भी की है।
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि कोरोना काल में पराली के धुएं से होने वाला प्रदूषण जानलेवा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पराली का धुआं इस बार भी असर दिखाने लगा है। दिल्ली सरकार ने पिछले कई सालों से प्रदूषण से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें कामयाबी भी मिली है। बड़ी संख्या में पौधरोपण से ग्रीन जोन रिकॉर्ड तौर पर बढ़ा है। इसके लिए नई वृक्षारोपण पॉलिसी भी लाई गई है। वहीं, स्मॉग टावर लगाने, ई-व्हीकल पॉलिसी लागू करने के साथ ही बसों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार की चिंता सिर्फ इन तीन महीनों में दिखाई देती है। पराली कोई दिल्ली की समस्या नहीं और यह कोई दिल्ली की देन भी नहीं है। पराली समस्या से पूरा उत्तर भारत प्रभावित और परेशान है, लेकिन केंद्र सरकार हाथ-पर-हाथ धरे बैठी है। सिसोदिया ने कहा कि केंद्र की निष्क्रियता का नुकसान पूरे उत्तर भारत को भुगतना पड़ रहा है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि सिर्फ दिल्ली की नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के प्रदूषण की बात होनी चाहिए। -
ईपीसीए की भूमिका पर सवाल
मनीष सिसोदिया ने ईपीसीए की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संबंधित राज्यों से प्रदूषण नियंत्रण कराने में ईपीसीए असफल क्यों है? राज्य सरकारों की तरह ईपीसीए भी प्रदूषण नियंत्रण में विफल नजर आती है।
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केंद्र से तत्काल कदम उठाने की मांग
मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार को पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण रोकने संबंधी जिम्मेवारी लेनी होगी। पराली प्रदूषण जैसे मामलों में केंद्र की निष्क्रियता के कारण पंजाब या हरियाणा से उठा धुआं दिल्ली यूपी होते हुए बिहार तक पहुंच जाता है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह दिल्ली सरकार सालों भर प्रदूषण रोकने के ठोस प्रयास करती रहती है, उसी तरह केंद्र सरकार को भी पूरे उत्तर भारत को प्रदूषण से निजात दिलाने की जिम्मेवारी लेनी होगी।