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Twin Towers Blast : वो 12 सेकंड... परिंदों को महीनों करेंगे परेशान, पेड़-पौधे भी होंगे हैरान

Wed, 31 Aug 2022 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली

सार

Blast : गौतमबुद्ध नगर और दिल्ली के यमुना से सटे इलाके हाल फिलहाल जीव-जंतुओं और वनस्पतियों से आबाद होते नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धमाके से निकली बड़ी मात्रा में धूल की चपेट में सबसे पहले कीट-पतंगें आए। यह पक्षियों समेत दूसरे जीव-जंतुओं के प्राथमिक भोजन हैं।
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ट्विन टावर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नोएडा स्थित ट्विन टावर बेशक महज 12 सेकंड में जमींदोज हो गया, लेकिन इसका असर काफी समय तक रहेगा। गौतमबुद्ध नगर और दिल्ली के यमुना से सटे इलाके हाल फिलहाल जीव-जंतुओं और वनस्पतियों से आबाद होते नजर नहीं आ रहे हैं। 

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विशेषज्ञों का मानना है कि धमाके से निकली बड़ी मात्रा में धूल की चपेट में सबसे पहले कीट-पतंगें आए। यह पक्षियों समेत दूसरे जीव-जंतुओं के प्राथमिक भोजन हैं। इससे धमाके की आवाज से दूर गए पक्षियों का जल्द वापस लौटना संभव नहीं होगा। इनकी बसावट में भी बदल आएगी। फिर, पीएम 2.3 व पीएम 1 स्तर के धूल के महीन कण हवा में देर तक टिके रहेंगे। इसका असर इंसान की सेहत पर भी पड़ेगा।

वहीं, धूल की मोटी परत जमने से वनस्पतियों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होगी। इससे पौधों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ेगा। हालांकि, विशेषज्ञ धमाके का असर जानने के लिए विस्तृत अध्ययन कराने की बात कर रहे हैं। इसके बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी।
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पौधों की पोषकता भी होगी कम
इतनी मात्रा में पैदा हुई धूल से पेड़-पौधों की पत्तियों के वह छिद्र (स्टोमेटा) बंद हो गए हैं, जिनसे वह अपना भोजन बनाते हैं। मतलब, स्टोमेटा से ही कार्बन डाई आक्साइड, ऑक्सीजन व जलवाष्प का पौधे लेन देन करते हैं। नतीजन भोजन बनाने वाली प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया की दर पौधों में कम होगी और पादपों की पोषकत पर बुरा असर पड़ेगा। घास जैसे छोटे पादपों से लेकर ऊंचे-ऊंचे वृक्षों तक पर इसका असर पड़ेगा। अकेले पेड़-पौधे ही नहीं, इससे नीचे से ऊपर पलने वाले जीव-जंतु भी इसकी चपेट में हैं। 

90 एक्यूआई के साथ हल्के ग्रीन जोन में आया शहर
ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण के बाद जिले में बढ़े प्रदूषण को बारिश ने पूरी तरह से धो दिया। इससे न सिर्फ प्राधिकरण व प्रदूषण विभाग ने राहत की सांस ली, बल्कि सांस के रोगियों को भी फायदा मिला। सोमवार रात व मंगलवार दोपहर हुई बारिश के बाद प्रदूषण का स्तर हल्के ग्रीन जोन में पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 90 पर पहुंच गया।

इससे पहले सोमवार को एक्यूआई का स्तर 230 दर्ज किया गया था। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि बारिश के कारण वातावरण में मौजूद धूल व हानिकारक कण पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए। इससे प्रदूषण के स्तर में सुधार और शहर हल्के ग्रीन जोन में शामिल हो गया। 

आवाज के सहारे ही सुरक्षा का संकेत पाते हैं जीव : फैयाज खुदसर
वाइल्फ लाइफ एक्सपर्ट फैयाज खुदसर के मुताबिक, अध्ययनों से पता चलता है कि आवाज के सहारे ही चिड़िया और इसी तरह के दूसरे जीव अपनी सुरक्षा व खान-पान का संकेत पाते हैं। जबकि शहरी परिवेश में ध्वनि प्रदूषण रहता है। इससे यह अपने आवास व प्रजनन स्थल से लेकर अपना पूरा व्यवहार बदल लेती हैं। ट्विन टावर धमाके की आवाज थोड़े समय के  लिए थी। ऐसे में पक्षियों समय दूसरे स्तनधारियों ने जगह बदल ली होगी। सामान्य अवस्था में कुछ दिन बाद वह वापस लौट जाते। लेकिन चूंकि कीट-पतंगे भी नहीं बचे हैं तो इनका जल्द लौटना संभव नहीं होगा।

दूसरी तरफ डीयू के सेंटर फॉर हिमालयन स्टडी के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर दीनाबंधु शाहू ने बताया कि ट्विन टावर के नजदीक की वनस्पतियां तो पूरी तरह धूल के गुबार में ढंक गई हैं। भारी कण तो दो-चार दिन में सतह पर गिर जाएंगे, लेकिन पीएम1 व पीएम2.5 स्तर के महीन कण लंबे समय तक हवा में मौजूद रहेंगे। इसका असर इंसान की सेहत पर भी पड़ेगा। हालांकि, उनका मानना है कि इस पर बड़ा अध्ययन होना चाहिए। 

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