स्कूल में हत्याकांड से संबंधित पुस्तक के विमोचन पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने रोक लगा दी है। यह पुस्तक एक अंग्रेजी अखबार की संवाददाता ने लिखी है। रथ और हार्पर कोलिंस इसे प्रकाशित कर रहे थे। स्कूल चलाने वाले की पुस्तक के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह रोक लगाई गई है। पुस्तक को अमेजन और फ्लिपकार्ट पर बेचा जाना थ। बच्चे का शव सितंबर 2017 में हरियाणा में गुरुग्राम के एक स्कूल के वॉशरूम से बरामद किया गया था।
याची ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि पुस्तक का टाइटल आपत्तिजनक और स्कूल की प्रतिष्ठा के लिए मानहानि पूर्ण है। यह सब स्कूल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने व सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किया गया है। पुस्तक प्रकाशित होती है तो उसके स्कूलों की प्रतिष्ठा और व्यापार को गंभीर नुकसान होगा, क्योंकि लोग धारणा बना सकते हैं कि स्कूल हत्या के लिए जिम्मेदार था।
याची ने कहा कि यह पुस्तक न केवल वर्तमान छात्रों और उनके अभिभावकों को भय और दहशत में डाल देगी, बल्कि भावी छात्रों को प्रवेश लेने से भी रोकेगी। याची ने आग्रह किया कि पुस्तक प्रकाशित होने से रोकी जाए और उसका शीर्षक बदलने का निर्देश दिया जाए।
हत्या के मामले में आरोपी की जुवेनाइलिटी याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरुग्राम ने 8 जनवरी 2018 को आदेश दिया था कि आरोपी बच्चे को काल्पनिक नाम से जाना जाएगा और स्कूल को ‘विद्यालय’ के रूप में संदर्भित किया जाएगा। याची ने कहा कि ऐसे में पुस्तक से स्कूल का नाम हटाया जाए। अदालत ने सभी तथ्य देखने के बाद प्रतिवादियों को अगले आदेश तक पुस्तक के विमोचन पर रोक लगाने को कहा।
प्रतिवादी बनाए गए पक्ष ने कोर्ट के समक्ष भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार पर जोर देते हुए याचिका का विरोध किया था। उनका कहना था कि इस मामले में स्कूल के नाम के साथ कई लेख, रिपोर्ट आदि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। ऐसे में उन्हें मानहानि के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 मई को तय की है।