नई दिल्ली। अदालत ने 2019 में हिरासत में कथित यातना के लिए दो निरीक्षकों और एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग याचिका पर दिल्ली पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है। याचिका निलंबित सीआईएसएफ कमांडेंट द्वारा दायर की गई है। पुलिस को 15 दिसंबर तक एटीआर दाखिल करनी है।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सिद्धांत सिहाग के समक्ष याची रंजन प्रताप सिंह ने कहा कि 20 अक्तूबर 2021 को दिल्ली पुलिस को उन्होंने शिकायत दी। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में सिंह ने आरोप लगाया कि उसे लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में अक्तूबर 2019 में तीन दिनों के लिए थर्ड डिग्री हिरासत में यातना दी गई थी।
याची ने कहा उन्हें एक आईएएस अधिकारी के पति की कार में कथित तौर पर ड्रग्स रखने और उन्हें झूठा फंसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसने दावा किया कि आईएएस अधिकारी ने उसे गलत तरीके से कैद करने और अपने पति को बचाने के लिए फर्जी आरोप लगाया।
याची ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उसे थर्ड डिग्री दी गई। जब वह बेहोश हो गया तो दो निरीक्षकों ने उससे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए। लोधी कॉलोनी थाने में न केवल उस रात बल्कि अगले दो दिनों और रातों तक बेरहमी से प्रताड़ित किया गया था। एम्स की एमएलसी की रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से यह साबित होता है उसे बाहरी चोट आई।
उन्होंने अदालत से लोधी कॉलोनी थाने के एसएचओ को राजस्थान में तैनात दो निरीक्षकों और आईएएस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है।