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Delhi News: अस्थमा हो सकता है 100 फीसदी तक नियंत्रित

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अस्थमा हो सकता है 100 फीसदी तक नियंत्रित
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- प्रदूषण के साथ बढ़ सकती है समस्या , कोविड के बाद बढ़े मामले
- विश्व अस्थमा दिवस पर विशेष -

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अस्थमा को 100 फीसदी तक नियंत्रित किया जा सकता है, हालांकि मरीज को डॉक्टर की सलाह पर इनहेलर व दवाईयों का नियमित इस्तेमाल करना चाहिए। इसे जड़ से खत्म करना फिलहाल मुमकिन नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि एलर्जी, प्रदूषण जैसे कारकों से दमे की समस्या हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि भारत में करीब 20 मिलियन दमा के रोगी हैं। यह आम तौर पर 5 से 11 साल के बीच के बच्चों में भी होता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुलिन गुप्ता ने कहा कि एलर्जी के कारण श्वास नली चोक हो जाती है, जिससे लंग्स तक श्वास सही तरह से नहीं पहुंच पाती। कई बार छाती से सीटी बचने जैसे आवाज आती है। ऐसे मरीजों को धूल, मिट्टी, गंदगी सहित एलर्जी वाले कारकों से दूर रहना चाहिए।
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वहीं अन्य डॉक्टरों का कहना है कि आबादी के 5 से 10 फीसद को अस्थमा का खतरा रहता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर देश व प्रदेश में अस्थमा के मरीज ज्यादा होते हैं। प्राइमस में पल्मोनरी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर अम्बरीष जोशी ने कहा कि बचने के लिए पानी खूब पिएं और हाइड्रेटेड रहें। अपने साथ एक इन्हेलर हमेशा रखें। इसके अलावा अस्थमा के इलाज में कोई कोताही न बरतें और डॉक्टर से नियमित रूप से जांच कराते रहें।
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बढ़ रहे हैं मामले
एमसीडी में चीफ मेडिकल ऑफिसर (आयुर्वेद) डॉ. आरपी पाराशर ने कहा कि भोजन में जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, रेडी टू ईट फूड आदि भोजन के विभिन्न रूपों के माध्यम से शरीर में जा रहे खतरनाक रसायनों की अत्यधिक मात्रा, फलों व सब्जियों में इंसेक्टिसाइड्स व पेस्टिसाइड्स की मौजूदगी तथा लगातार बढ़ते प्रदूषण जैसे कारणों के चलते अस्थमा के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां सर्दी के मौसम में अस्थमा के मरीज अधिक आते थे अब प्रदूषण के कारण गर्मियों में भी अस्थमा के अच्छे खासे मरीज आ रहे हैं।
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