- दिल्ली को चिकित्सा ऑक्सीजन उत्पादन और आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर बनाना मुख्य उद्देश्य है।
- मेडिकल ऑक्सीजन के नए विनिर्माण उद्यमों की स्थापना होगी, कोविड-19 या अन्य स्वास्थ्य संकट के दौरान अस्पतालों और नर्सिंग होम को निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति करना।
- दिल्ली में मेडिकल ऑक्सीजन के भंडारण और परिवहन की सुविधा को बढ़ाना।
पॉलिसी का लक्ष्य
- कुल 100 मीट्रिक टन, न्यूनतम 50 मीट्रिक टन ऑक्सीजन (एलओएक्स) विनिर्माण।
- न्यूनतम 10 मीट्रिक टन के गैर-कैप्टिव ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों (पीएसए, एयर सेपरेशन यूनिट प्रौद्योगिकी) की स्थापना।
- अस्पतालों और नर्सिंग होम में न्यूनतम 500 एलपीएम क्षमता के कैप्टिव ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट (पीएसए, एयर सेपरेशन यूनिट टेक्नोलॉजी) की स्थापना, ताकि 200 मीट्रिक टन की कुल क्षमता तक मेडिकल ऑक्सीजन की उनकी अधिकतम मांग को पूरा किया जा सके।
- अधिकतम 500 मीट्रिक टन और नियूनतम 10 मीट्रिक टन क्रायोजेनिक टैंकरों की स्थापना करना।
- अधिकतम 1000 मीट्रिक टन, न्यूनतम 10 मीट्रिक टन क्षमता के एलएमओ भंडारण टैंकों की स्थापना करना।
ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों को बिजली सब्सिडी
नई पॉलिसी में मेडिकल ऑक्सीजन के व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाली इकाइयों को पहले पांच वर्ष 4 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली बिल जमा करने की छूट देने का निर्णय लिया गया है।
एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति
दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि संयंत्र लगाने वाली इकाइयों की एसजीएसटी की भरपाई एक महीने में कर दी जाएगी।
सब्सिडी लेने के लिए ये जानना जरूरी
ऑक्सीजन निर्माण संयंत्र लगाने वाली इकाइयों को पहले तो अधिसूचना की तारीख से 15 दिनों के अंदर सब्सिडी के लिए आवेदन करना होगा। ड्रा के माध्यम से सभी पात्र आवेदकों को चुना जाएगा। बाद में हर महीने 15 दिन तक सब्सिडी के लिए आवेदन किए जा सकेंगे। ध्यान रखना है कि पॉलिसी की अधिसूचना जारी होने की तारीख से 6 महीने तक आवेदन लिए जाएंगे।