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टीका है जरूरी: अपोलो अस्पताल के एक अध्ययन में दावा, 95 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारियों में वैक्सीन रही असरदार

Wed, 16 Jun 2021 08:36 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इसी साल 15 जनवरी से 30 मई के बीच तकरीबन साढ़े चार माह तक चले अध्ययन में 31,621 स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन देने के साथ ही उनकी स्थिति को लेकर भी समीक्षा की गई। अध्ययन के परिणामों से साफ हो गया है कि वैक्सीन के बाद होने वाला संक्रमण आमतौर पर हल्का होता है और वैक्सीन मरीज को गंभीर या फिर आईसीयू की आवश्यकता से बचाती है। 
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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दिल्ली के अपोलो अस्पताल ने एक अध्ययन के जरिए दावा किया है कि देश भर में मौजूद उनके अस्पतालों में 95 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारियों में वैक्सीन असरदार मिली है। अध्ययन से पता चला है कि वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमण सिर्फ 4.28 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारियों में ही पाया गया लेकिन इन्हें जब कोरोना हुआ तो तबियत गंभीर नहीं हुई। इनमें कोरोना के लक्षण हल्के या फिर बिलकुल भी नहीं मिले। 

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इसी साल 15 जनवरी से 30 मई के बीच तकरीबन साढ़े चार माह तक चले अध्ययन में 31,621 स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन देने के साथ ही उनकी स्थिति को लेकर भी समीक्षा की गई। अध्ययन के परिणामों से साफ हो गया है कि वैक्सीन के बाद होने वाला संक्रमण आमतौर पर हल्का होता है और वैक्सीन मरीज को गंभीर या फिर आईसीयू की आवश्यकता से बचाती है। साथ ही मौत की आशंका को भी कम करने में सफल है। 

अध्ययन से यह भी पता चला कि सिर्फ 90 मामले यानि 0.28 फीसदी मामलों में ही मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इनमें सिर्फ तीन मामलों (0.01 फीसदी) में आईसीयू में भर्ती की जरूरत पड़ी। अध्ययन के सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह थे कि वैक्सीन के बाद संक्रमण से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। 
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24 शहरों की 43 यूनिट में कार्यरत इन स्वास्थ्य कर्मचारियों पर टीकाकरण के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। समूह चिकित्सीय निदेशक डॉ. अनुपम सिब्बल का कहना है कि इस महत्वपूर्ण अध्ययन से साफ है कि वैक्सीन लगने के बाद कोविड के मामले में गंभीर लक्षणों की संभावना कम हो जाती है। मरीज मौत से भी सुरक्षित रहता है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ज्यादातर मामले ऐसे हैं जिन्हें एक खुराक दी गई और कुछ दिन बाद वे संक्रमित हो गए। जिन लोगों ने दोनों खुराक ली हैं उनके बेहद कम लोग संक्रमित हो रहे हैं और उनमें भी अधिकांश स्वत: स्वस्थ्य भी हो रहे हैं। 
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अध्ययन के महत्वपूर्ण तथ्य
. 28,918 स्वास्थ्यकर्मियों को (91.45 फीसदी) कोविशील्ड लगाई गई थी, जबकि 2703 (8.55 फीसदी) को कोवाक्सिन दी गई थी। 
. 25,907 यानि 81.9 फीसदी को दोनों खुराक दी जा चुकी थी। जबकि 5,714 यानि 18.1 फीसदी को पहली खुराक ही दी गई थी। 
. दोनों खुराक लेने वालों में 1061 यानि 4.09 फीसदी को संक्रमण हुआ। 
. एकल खुराक लेने वालों में 294 यानि 5.14 फीसदी को संक्रमण हुआ। 
. पहली खुराक लेने के दो सप्ताह के अंदर 17.69 फीसदी संक्रमित मामले सामने आए। 
. दोनों खुराक लेने के दो सप्ताह बाद 5.60 फीसदी संक्रमित मामले सामने आए। 
. वैक्सीन लेने के बाद संक्रमित 1355 में किसी की भी मौत नहीं। 
. 90 अस्पताल में भर्ती हुए जिनमें 48 पुरूष और 42 महिलाएं थीं। इनमें 83 लोगों की आयु 50 वर्ष से कम थी। 

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