आम आदमी पार्टी (आप) की बागी विधायक अलका लांबा बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल के सामने पेश हुईं। मामला आप की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस की सदस्यता लेने से जुड़ा हुआ है।
इसके आधार पर विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार देने की पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज की शिकायत पर अलका लांबा की पेशी हुई। हालांकि, सुनवाई के दौरान अलका लांबा ने लिखित तौर पर आप से इस्तीफे व कांग्रेस की सदस्यता लेने के आरोपों से इनकार किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने बृहस्पतिवार तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है।
बाद में अलका लांबा ने बताया कि पार्टी लंबे समय से दबाव बना रही थी कि वह ट्विटर पर इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे। इसके आधार पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लेकिन बुधवार की कार्यवाही के लिए ट्विटर का इस्तीफा पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना गया। लांबा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कांग्रेस की सदस्यता का प्रमाण नहीं है।
अभी औपचारिक तौर पर उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है। अलका लांबा ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष पर आप का दबाव है। वह अयोग्य करार देने का बहाना ढूंढ रहे हैं। बृहस्पतिवार तक उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा देने का कहा है। हालांकि, अलका लांबा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।
दूसरी तरफ सौरभ भारद्वाज का कहना है कि अलका लांबा विधानसभा में डरी हुई थीं। उनका कहना था कि ट्विटर पर दिए गए उनके इस्तीफे को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। वहीं, कांग्रेस की सदस्यता लेने को भी उन्होंने गलत बताया। सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया क्या इस तरह के नेता पर लोगों का यकीन बन सकेगा। उनकी घोषणाओं की कीमत क्या है।
एक दिन वह कहती हैं कि वह निर्दलीय विधायक है और दूसरे दिन कांग्रेस की सदस्यता लेने की बात कहती हैं। जबकि कानूनी तौर पर वह सबसे इनकार करती हैं।