मानव अंगों को लेकर एम्स के डॉक्टरों ने दुनिया में एक नई पहल शुरू की है। विश्व स्तर के वैज्ञानिकों को सलाह देते हुए मानव अंगों के नामकरण के लिए नई शब्दावली की मांग की है। उन्होंने इसके लिए अपनी ओर से नए शब्द भी सुझाए हैं। इसे लेकर हाल ही में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के जर्नल ऑफ मेडिसिन में लेख भी प्रकाशित कराया है।
दिल्ली स्थित एम्स के पूर्व एवं पटना एम्स के वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष का कहना है कि वर्ष 2016 में आयरलैंड के वैज्ञानिकों ने आंत और गुदा के बीच के हिस्से को मेसेंट्री या आंत्रपेशी के तौर पर खोज कर नए अंग की संज्ञा दी। इसके बाद कुछ और ऐसे ही अंगों की खोज हुई। उनका कहना है कि नए खोजे गए इन हिस्सों को अंग कहना सही नहीं होगा, क्योंकि ये अंग की परिभाषा का पूरी तरह से पालन नहीं करते हैं।
उनका कहना है कि आम तौर पर अंग की संज्ञा उसे ही दी जाती है, जिसका अपना अलग टिशू हो, काम हो और अलग बीमारी हो। इन तीनों में से किसी एक के अलग होने पर अलग अंग की संज्ञा नहीं देनी चाहिए।
उनका तर्क है कि खोजे गए ऐसे नए हिस्सों को यॉक आर्गन या कांजुगेट आर्गन का नाम दिया जा सकता है। इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि अभी तक मानव अंगों के नामकरण की कोई शब्दावली नहीं है। इसलिए इसके लिए एक नई शब्दावली का गठन होना चाहिए और उसमें ऐसे नए खोजे गए हिस्सों के लिए अलग वर्गीकरण भी होना चाहिए।