डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स
- फोटो : Amar Ujala
कोरोना से ठीक होने वाले या संक्रमण के दौरान मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते मरीजों की मौत तक हो रही है। एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, आमतौर पर पांच से 10 दिन तक ही स्टेरॉयड की जरूरत पड़ती है, इससे ज्यादा दिनों तक मरीज को यह दवाएं दी जाएं तो ब्लैक फंगस की आशंका काफी बढ़ जाती है।
स्टेरॉयड दे रहे हैं तो मरीज की पूरी निगरानी करना भी स्वास्थ्य कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। ब्लैक फंगस से बचने के लिए मरीज की निगरानी बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि एम्स में अब तक 23 मरीज ब्लैक फंगस के चलते भर्ती हुए हैं। इनमें 20 मरीज कोविड संक्रमित है। जबकि तीन हाल ही में कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं। इसके अलावा देश के कई राज्यों में म्यूकरमाइकोसिस के 500 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा, अगर इससे बचना है तो मरीज, अस्पताल और स्वास्थ्य कर्मचारियों को सतर्कता बरतनी होगी।
अनियंत्रित मधुमेह, स्टेरॉयड का अधिक एवं बेवजह इस्तेमाल और कोरोना संक्रमण से ब्लैक फंगस जानलेवा हो सकता है। यह संक्रमण पहले से ही भारत में है, लेकिन काफी सीमित मामले सामने आते रहे हैं।