बीआर चोपड़ा की महाभारत के भीम यानी प्रवीण कुमार सोबती ने देश की धार्मिक भावना की कद्र करते हुए अपने भविष्य को दांव पर लगा दिया। भीम की ख्याति बनी रहे, इसके लिए उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और करियर से किनारा कर मुंबई से दिल्ली लौट आए। दिल्ली में अशोक विहार स्थित अपने निवास स्थान पर मंगलवार को उन्होंने 74 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली।
महाभारत के आचार्य द्रोणचार्य का किरदार निभाने वाले सुरेन्द्र पाल सिंह प्रवीण कुमार को याद करते हुए भावुक हो उठे। उन्होंने नम आंखों से प्रवीण कुमार को श्रद्धांजलि दी और उनके त्याग को देश का गौरव बताया। उन्होंने बताया कि प्रवीण कुमार मुंबई से दिल्ली इसलिए चले आए, क्योंकि वहां रहते उन्हें फिल्मों में काम करने का लगातार ऑफर मिल रहा था। लंबी कद काठी होने के नाते ज्यादातर डायरेक्टर उन्हें खलनायक का किरदार निभाने का ऑफर देते। पैसे के लालच में कहीं कोई किरदार निभाने के लिए वह हां न कर दें, इसलिए बिना देर किए वह दिल्ली आ गए। वह नहीं चाहते थे कि फिल्म में कोई ऐक्टर उन्हें पीटे और लोग कहें, देखो भीम पिट रहा है।
ऐसे बदल गई गुरु शिष्य की भूमिका
सुरेन्द्र पाल बताते हैं कि महाभारत के सेट पर प्रवीण कुमार उनसे बहुत सीनियर थे। स्पोर्ट्स मैन होने की वजह से उनका बड़ा नाम था। वह एशियन गेम्स में चार मेडल जीत चुके थे और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। इतने बड़े होने के बावजूद सेट पर वह सबसे अधिक मिलनसार और सरल रहते। वह सभी साथी कलाकारों को सिखाते कि सब अपनी सेहत का ख्याल रखें। विशेष रूप से एक लाइन बार-बार दोहराते, फिल्म इंडस्ट्री डरबी की रेस है, सेहत अच्छी होगी तो आपका घोड़ा कभी भी दौड़ने लग जाएगा।
सभी उनकी यह बात मानते और हम उन्हें गुरु कहके संबोधित करते। जब महाभारत में उन्हें गुरु द्रोंण का किरदार मिला, तो प्रवीण कुमार ने कहा, ओए अब तो तू गुरु बन गया भाई। तब से वह सुरेन्द्र पाल को गुरु कहके बुलाते। हाल ही में उनसे मुलाकात हुई तब भी उन्होंने इस बात को दोहराया था कि जीवन में उसी दिन उन्हें सबकुछ हासिल हो गया, जब देश के घर-घर में उन्हें भीम के रूप में पहचान मिली। वह प्रतिभा के धनी और मस्त-मौला इंसान थे।
आंसू नहीं रोक पा रहे थे अर्जुन
महाभारत में भीम के छोटे भाई अर्जुन का किरदार निभाने वाले अर्जुन फिरोज खान प्रवीण कुमार के अचानक चले जाने से टूट से गए हैं। बातचीत के दौरान वह द्रवित हो उठे, करीब मिनट भर तक उनके आंसू नहीं रुक रहे थे। किसी तरह उन्होंने रूंधे गले से एक गीत, जाने वाले कभी नहीं आते, उनकी याद हमेशा आती है... गाकर बातचीत की शुरुआत की। खुद को संभालते हुए अर्जुन ने कहा, मेरा एक ही यार था, वो चला गया।
महाभारत के सेट पर सब उसकी बड़ी इज्जत करते और बड़ी तमीज से बात करते। एक मैं ही उसका इकलौता यार था, जो आपस में हंसी मजाक करते रहते। हम एक दूसरे के दिल के बहुत करीब थे। पंजाबी टोन में वो हमेशा ओए अरजन कहके पुकारते, अब ऐसे कौन पुकारेगा। उन्होंने बताया कि प्रवीण कुमार का सेंस ऑफ ह्यूमर गजब का था। हाल ही में उनसे हुई बातचीत हुई थी, अर्जुन ने बताया कि वाराणसी में शूटिंग के दौरान उन्होंने फोन किया तो प्रवीण ने उन्हें घर बुलाया था। उन्होंने कहा अब वह दिल्ली में किस यार के घर जाएंगे। यह कहते-कहते फिर उनका गला भर आया।