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आठ साल बाद धरा 7 करोड़ ठगी का आरोपी

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नई दिल्ली। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने डीडीए के प्लॉट के फर्जी कागजात तैयार कर बेचने वाले सुरेश शर्मा (42) को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। वहां सेक्टर 7ए हाउसिंग बोर्ड कालोनी में रहने वाले सुरेश ने साथियों के संग खुद को प्लॉट का मालिक बताकर एक व्यक्ति से 7 करोड़ रुपये ठग लिए थे। इस मामले में अदालत ने उसे भगोड़ा करार दिया था। शिकायत दर्ज होने के आठ साल बाद वह गिरफ्तार हो पाया है। इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 6 ठग पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। अब केवल एक महिला फरार है।
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ईओडब्ल्यू के संयुक्त आयुक्त डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2013 में मॉडल टाउन निवासी संजय गोयल और उनके रिश्तेदारों ने ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि वे रोहिणी और द्वारका में प्लॉट लेना चाहते थे। इसके लिए प्रॉपर्टी डीलर जितेंद्र गुप्ता से संपर्क किया। जितेंद्र व उसके साथियों ने रोहिणी में पांच और द्वारका में एक प्लॉट फर्जी कागजात बनाकर उन्हें और रिश्तेदारों को बेच दिए और 7 करोड़ रुपये ठग लिये।
पुलिस ने डीडीए से संबंधित प्लॉट की जानकारी ली तो पता चला कि उसने इन प्लॉटों का स्वामित्व किसी को नहीं दिया है। ठगी फर्जी कागजात बनाकर की गई है। पुलिस ने जितेंद्र गुप्ता समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। फर्जीवाड़े में शामिल सुरेश शर्मा को अदालत ने वर्ष 2014 में भगोड़ा घोषित कर दिया। 12 फरवरी को पुलिस ने उसे फरीदाबाद से गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में सुरेश ने बताया कि उसने दिनेश शर्मा बनकर रोहिणी के प्लॉट को शिकायतकर्ता के रिश्तेदार संतोष गुप्ता को बेचा था। इसके बदले उसे 3.9 करोड़ रुपये मिले थे। पांच प्लॉट अन्य आरोपियों ने बेचे थे। पुलिस के मुताबिक, दसवीं तक पढ़ा सुरेश गुप्ता गलत संगत के कारण कर्ज में डूब गया। इसके बाद वह फर्जीवाड़ा करने लगा।
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