संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। प्रीत विहार स्थित बाल मंदिर सीनियर सेकेंड्री स्कूल का प्रांगण शनिवार को त्रेतायुग में बदल गया। चारों ओर मंत्रमुग्ध कर देने वाले संवाद, संगीत और जीवंत अभिनय ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। इस दौरान मंच पर ताड़का वध से लेकर सीता स्वयंवर तक के दृश्य इतने प्रभावशाली रहे कि पूरा प्रांगण बार-बार जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
मंच संचालन चौथी कक्षा के वंश सिंगल और छठी की आस्था शंकर ने किया। उनकी ओजस्वी आवाज ने सभी मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचन की शुरुआत दशरथ कुमारों की शिक्षा-दीक्षा के प्रसंग से हुई। गुरु वशिष्ठ के आश्रम का दृश्य इतना जीवंत था कि दर्शकों को सचमुच आश्रम का अनुभव हुआ। अयोध्या में गुरु विश्वामित्र का आगमन और दशरथ से राम-लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा के लिए ले जाने का अनुरोध भावनात्मक लगा। दशरथ की व्यथा और गुरु वशिष्ठ का समझाना लोगों को भावुक कर गया। इसके बाद अहिल्या उद्धार का दृश्य आते ही पूरा पंडाल शांत हो गया। जब अहिल्या ने कृतज्ञता से श्रीराम को प्रणाम किया, कई दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए। ताड़का मंच पर आईं और खा जाऊंगी मैं सबको खा जाऊंगी कहते हुए दर्शकों की ओर बढ़ी। राम के ताड़का का वध करते ही जय श्रीराम के नारे गूंजने लगे।
इसके बाद मंच पर मिथिला नगरी जीवंत हो उठी। पुष्पवाटिका में सीता का राम को देखना, दुर्गा पूजा का दृश्य और स्वयंवर का रोमांचक प्रसंग दर्शकों को बांधे रहा। जब राम ने शिव धनुष तोड़ा, पूरे प्रांगण में सन्नाटा छा गया और फिर एक साथ जयकारों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। इसके बाद जब सीता ने राम के गले में वरमाला डाली और विदाई का दृश्य देख लोगों का दिल भर आया। प्रधानाचार्या संतोष आहूजा, निदेशक योगेश अरोड़ा, प्रबंधन कमेटी के वरिष्ठ सदस्य गुरुदत्त अरोड़ा मुख्य रूप से मौजूद रहे।