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मार्च के बाद इतने सुधरे हालात: दिल्ली के अस्पतालों में 95 फीसदी बेड खाली, 1300 से कम रह गई भर्ती मरीजों की संख्या

Sun, 20 Jun 2021 10:10 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना की लहर शुरू हो गई थी। 12 अप्रैल तक अस्पतालों में 6 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो गए थे। 22 अप्रैल के बाद हालात खराब होने लगे थे और भर्ती मरीजों की संख्या 19 हजार को पार कर गई थी। आलम यह था कि सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड भर गए थे, लेकिन अब करीब तीन महीने बाद अस्पतालों में 1500 से कम मरीज भर्ती हैं और 22 हजार से ज्यादा बेड खाली हैं।
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कोरोना वार्ड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राजधानी में कोरोना का दायरा सिमट चुका है। अब अस्पतालों में भी 95 फीसदी बेड खाली हो गए हैं। 1300 से कम मरीज ही भर्ती हैं। मार्च के बाद पहली बार हालात इतने बेहतर हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का प्रसार अब नहीं हो रहा है। यही कारण है कि नए मामले घट रहे हैं। इससे अस्पतालों में भी मरीज नहीं बढ़ रहे हैं। अब जरूरी है कि लोग लापरवाही न बरते नहीं तो फिर से हालात खराब हो सकते हैं। 

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दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना की लहर शुरू हो गई थी। 12 अप्रैल तक अस्पतालों में 6 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो गए थे। 22 अप्रैल के बाद हालात खराब होने लगे थे और भर्ती मरीजों की संख्या 19 हजार को पार कर गई थी। आलम यह था कि सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड भर गए थे, लेकिन अब करीब तीन महीने बाद अस्पतालों में 1500 से कम मरीज भर्ती हैं और 22 हजार से ज्यादा बेड खाली हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में इस समय कोविड मरीजों के लिए 23,638 बेड हैं। इनमें से 22,357 खाली हैं और 1281 पर मरीज भर्ती हैं। इस लिहाज से देखें तो 95 फीसदी बेड खाली हैं। वहीं, आईसीयू बेड की बात करें तो कुल 6630 आईसीयू बेड में से 723 पर मरीज भर्ती हैं और 5907 खाली हैं। यानी, 89 फीसदी आईसीयू बेड भी खाली हो गए हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों की बात करें तो उनमें भी करीब 90 फीसदी आईसीयू बेड खाली हैं, क्योकि अधिकतर गंभीर मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है।
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हिंदूराव अस्पताल के डॉक्टर सिद्धार्थ तारा का कहना है कि अब अस्पताल में नए दाखिले न के बराबर हो रहे हैं। इससे पता चलता है कि वायरस का प्रसार थम गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि दिल्ली में हुए अनलॉक के बाद अब लोग लापरवाही बरतने लगे हैं। इससे आने वाले समय में हालात फिर से खराब हो सकते हैं। अब अगली लहर आने की भी पूरी आशंका है। ऐसे में जरूरी है कि लोग नियमों का पालन करते रहें। साथ ही भीड़भाड वाले इलाकों में जाने से बचें क्योकि, वायरस का प्रसार कम हुआ है। यह महामारी खत्म नहीं हुई है।
 

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आधे से ज्यादा मरीज अभी भी आईसीयू में

दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कुल 1281 मरीजों में से अभी भी 723 रोगी आईसीयू में हैं। इससे पता चलता है कि 50 फीसदी से ज्यादा रोगियों की हालत गंभीर है। मार्च के आखिरी सप्ताह से ही गंभीर मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। एम्स में कोरोना आईसीयू वार्ड की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉक्टर युद्धवीर सिंह बताते हैं कि देश में कोरोना की दूसरी लहर में पहले के मुकाबले कई गुना मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए। इनमें से अधिकतर ही हालत गंभीर थी। नए स्ट्रेन के कारण मरीजों में गंभीर लक्षण आए। यही कारण है कि अस्पतालो में रोगियों की संख्या कम होने के बावजूद भी आईसीयू में 50 फीसदी से ज्यादा मरीज हैं। 

अस्पतालों में ऐसे कम हुई मरीजों की संख्या
तारीख मरीज
20 मई 12462
24 मई 8791
28 मई 6037
2 जून 4012
6 जून 2789
10 जून 2320
14 जून 1789
18 जून 1486
20 जून 1281

नोट- आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं।
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