विधायक के जरिए पेंशन जारी करने पर मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने कहा, अगर पेंशन की शिकायतें आई हैं तो वह दिखाई जाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने वृद्घावस्था और विधवा पेंशन विधायक के जरिए जारी करने के मामले में दिल्ली सरकार के जवाब से असंतोष जाहिर करते हुए फटकार लगाई है। दिल्ली सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि पेंशन भुगतान की शिकायतें दर्ज होने पर ही यह फैसला लिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने इन शिकायतों के बारे में दिल्ली सरकार के समाज कल्याण सचिव से जवाब मांगते हुए सुनवाई के लिए 13 मार्च की तारीख तय की है।
सरकार के जवाब पर कोर्ट ने असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि यह सरकारी योजना है। सरकार ऐसे और वो भी पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किसी को अधिकार नहीं दे सकती। खंडपीठ ने कहा कि अगर ऐसी शिकायतें आई हैं तो वह शिकायतें दिखाई जाएं।
दिल्ली सरकार ने विधवा और बुजुर्गों को आसानी से पेंशन उपलब्ध कराने के लिए आधार की अनिवार्यता को खत्म करने का फैसला किया था। सरकार का कहना था कि आधार की अनिवार्यता से लोगों को परेशानी हो रही थी।
इस मुद्दे पर पार्षद वेद पाल की ओर से वकील ऋषिपाल ने जनहित याचिका दायर की है। पेश याचिका में दिल्ली सरकार के पेंशन जारी करने का अधिकार क्षेत्रीय विधायक को सौंपे जाने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में दिल्ली सरकार की डोर स्टेप डिलीवरी पर भी सवाल उठाया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि एक तरफ तो सरकार डोर स्टेप डिलीवरी के जरिए बेहतर सुविधाएं और लोगों की समस्या जल्द सुलझाने का दावा कर रही है। वहीं वृद्घों और विधवाओं के लिए परेशानी का सबब बन रही है। कोर्ट ने इस पर दिल्ली सरकार से हलफनामा मांगा था।