पिछले कुछ दिनों से देवी सिंह का परिवार अपने गांव गया हुआ था। देर रात को दो झुग्गियों में कमलेश और नथनी का परिवार अपनी-अपनी झुग्गियों में मौजूद था। देर रात करीब 12.28 बजे खेत के पास ही रहने वाली ज्योति और दयाशंकर ने देखा कि कमलेश की झुग्गी में आग लगी है। ज्योति व उसके भाई दीपक ने शोर मचाया, वहीं दयाशंकर भी बाकी लोगों को उठाने में जुट गया। इस बीच लोग उसकी झुग्गी की ओर भागे। शोर सुनकर नथनी के परिवार के पांच सदस्य तो किसी तरह बाहर निकल गए। लेकिन कमलेश और उसका परिवार अंदर फंस गया। इस बीच आग बढ़ गई।
मामले की सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी गई। किसी तरह लोगों ने खेतों की ट्यूबवेल चलाकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन उसी दौरान कमलेश की झुग्गी में धमाका हो गया। इसके बाद आग ने दूसरी झुग्गी को भी अपनी चपेट में ले लिया। दूसरी झुग्गी में रखा सिलिंडर भी फट गया। कुछ देर बाद मौके पर पुलिस और दमकल की गाड़ियां पहुंची। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के बाद कमलेश की झुग्गी का दरवाजा तोड़ा। अंदर बुरी तरह झुलसी हुई हालत में कमलेश, उसकी पत्नी और चारों बच्चें के शव मिले। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है। पुलिस ने लापरवाही, आग लगने और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस को घटना स्थल से दो सिलिंडर फटे हुए मिले हैं।
कुछ देर तक झुग्गी से आई थी चिल्लाने की आवाजें, और फिर हो गई खामोश...
बिजवासन की झुग्गी में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत ने सभी को झकझोरकर रख दिया है। जिसने भी घटना स्थल देखा उसके होश उड़ गए। कमलेश के पड़ोस में रहने वाले दयाशंकर बताते हैं कि आग लगने के बाद अचानक कमलेश की झुग्गी से चिल्लाने की आवाजें आने लगी, लेकिन जैसे ही आग बढ़ी, कुछ ही देर बाद चिल्लाने की आवाजें आना बंद हो गई। इसके बाद जब दमकल कर्मी मौके पर पहुंची और उन्होंने झुग्गी का दरवाजा तोड़कर शवों को बाहर निकाला। अंदर का मंजर बेहद भयावह था। कमलेश का शव अलमारी के पास पड़ा था, जबकि बाकी सभी के शव सिलिंडर के पास पड़े थे। कुछ शवों के तो बस अवशेष ही बचे थे। पुलिस कमलेश के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है।