-डीजेबी ने अपने हालिया हलफनामे में एनजीटी को दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया कि उसने संगम विहार में सीवेज नेटवर्क बिछाने के प्रयास के दौरान 44 अनधिकृत कॉलोनियों की पहचान की है। उनमें से 33 वन भूमि पर अतिक्रमण है। डीजेबी के हलफनामे के अनुसार, इनमें से 22 कॉलोनियां पूरी तरह से वन भूमि पर बनी हैं। जबकि 11 आंशिक रूप से वन भूमि पर स्थित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली की 1,799 अनधिकृत कॉलोनियों में से 44 संगम विहार क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि 33 दक्षिणी और दक्षिण-मध्य रिज पर अतिक्रमण कर रही हैं। वन क्षेत्र में स्थित इन 33 अनधिकृत कॉलोनियों में से 11 कॉलोनियों में सीवर का काम चल रहा है, जो आंशिक रूप से वन क्षेत्र में स्थित हैं। डीजेबी ने बताया कि सीवर लाइन बिछाने का काम केवल गैर-वन क्षेत्र में ही किया जा रहा है। अब तक आठ कॉलोनियों में सीवर लाइनें बिछाई जा चुकी हैं। एनजीटी इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को करेगा।
एनजीटी ने मार्च 2024 में मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें बताया गया था कि संगम विहार की आंतरिक गलियां टूटी हुई हैं। साथ ही, अनधिकृत कॉलोनियों में जगह-जगह कूड़ा फैला हुआ है। वन भूमि पर निर्माण कार्य करने के लिए दिल्ली में एजेंसियों को रिज प्रबंधन बोर्ड (आरएमबी), दिल्ली के वन एवं वन्यजीव विभाग और सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) से मंजूरी लेनी होती है। दिल्ली में चार प्रमुख रिज क्षेत्र हैं, जिनमें से लगभग 7,784 हेक्टेयर भूमि को आरक्षित वन माना जाता है। सबसे बड़ा रिज दक्षिणी रिज है जो 6,200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, उसके बाद मध्य रिज है जो 864 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। महरौली में दक्षिण-मध्य रिज 626 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और उत्तरी रिज 87 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। इसके अतिरिक्त, नानकपुरा दक्षिण-मध्य रिज सात हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है।