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पहली बार मिले 28395 संक्रमित, 277 की मौत

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस की चौथी लहर का सामना करने वाली दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। पहली बार एक दिन में 28395 लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि 277 लोगों की मौत हुई है। इतना ही नहीं राजधानी में कोरोना की जांच में भी भारी कमी देखने को मिल रही है।
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बीते 14 अप्रैल को एक दिन में 1.08 लाख नमूनों की जांच हुई थी लेकिन पिछले एक दिन में 86 हजार नमूनों की जांच हुई। आंकड़ों के अनुसार पहली बार दिल्ली में संक्रमण दर 32 फीसदी पार हुई है। इससे पहले नवंबर 2020 में जब दिल्ली तीसरी लहर का सामना कर रही थी, उस दौरान संक्रमण दर 30 फीसदी तक पहुंच गई थी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक दिन में 86526 नमूनों की जांच में 32.82 फीसदी कोरोना संक्रमित मिले हैं। कुल 28395 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 277 लोगों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस बीच राहत की खबर है कि 19430 मरीजों को स्वस्थ घोषित किया गया। इसी के साथ ही कुल संक्रमित मरीजों की संख्या नौ लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। कुल 9,05,541 में से अब तक 8,07,328 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं 12638 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में कोरोना की मृत्युदर अभी भी 1.40 फीसदी है जोकि राष्ट्रीय औसत 1.18 फीसदी की तुलना में काफी अधिक है। हर दिन नए मामले अधिक आने से सक्रिय मरीज भी बढ़कर 85575 हो चुके हैं। इनमें 40124 मरीज अपने घरों में आइसोलेशन में हैं। विभाग ने बताया कि दिल्ली में कंटेनमेंट जोन की संख्या भी अब 17151 हो चुकी है। वहीं मंगलवार को एंबुलेंस के लिए 1282 फोन लिए गए।
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कर्फ्यू का असर टीकाकरण पर
दिल्ली में कर्फ्यू लगने की वजह से टीकाकरण पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को राजधानी में 59491 लोगों ने वैक्सीन लगवाई, जबकि अन्य दिनों में यह आंकड़ा 80 हजार तक पहुंच गया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 39141 लोगों ने पहली और 20350 ने दूसरी डोज लेकर कोर्स पूरा किया है। दिल्ली में अब तक 26.73 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है जिनमें से केवल 4.79 लाख लोग ही दोनों डोज लेकर वैक्सीन कोर्स पूरा कर चुके हैं।
तीन हजार बिस्तर खाली
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि दिल्ली में अभी भी तीन हजार बिस्तर खाली हैं, जबकि अस्पतालों की स्थिति देख पता चल रहा है कि मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। विभाग ने बताया कि 19604 में से 16418 बिस्तर भरे हैं, 3186 बिस्तर खाली हैं जबकि अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार और प्राइवेट के सभी बड़े अस्पताल लगभग भर चुके हैं।
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