नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की 20 साल के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, पीड़िता के बयान में कोई विरोधाभास नहीं है और यह ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का बयान और मामले में प्रस्तुत फोरेंसिक रिपोर्ट आरोपों को साबित करती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
याचिका के अनुसार, दोषी अपीलकर्ता की पीड़िता से मुलाकात उसकी एक दोस्त के माध्यम से हुई थी। फरवरी 2021 में पीड़िता उससे मिलने पार्क गई थी, जहां अपीलकर्ता ने उसे घुमाने के बहाने ऑटो में एक अन्य पार्क में ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद उसने धमकी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया तो वह उसे मार देगा। दोषी ने धमकी देकर पीड़िता के साथ दो और बार शारीरिक संबंध बनाए। ट्रायल कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपीलकर्ता को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।