नेशनल बुक ट्रस्ट की बिक्री में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कई प्रकाशकों ने बताया कि इस बार लोग स्टॉल पर ज्यादा समय रुके, किताबें देखी और खरीदीं। खासतौर पर बच्चों की किताबें और सामान्य रुचि की पुस्तकें ज्यादा पसंद की गई। इस साल पहली बार मेले में अच्छे और नए ढंग से बनाए गए स्टॉल्स के लिए प्रकाशकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र दिए गए। इनमें कतर (गेस्ट ऑफ ऑनर देश), संस्कृति मंत्रालय, नोशन प्रेस, राजकमल प्रकाशन, हार्पर कॉलिन्स, पेगासस और वी के ग्लोबल शामिल रहे।
चिल्ड्रन पवेलियन में किड्ज एक्सप्रेस में कहानी सुनाना, नाटक, कला-शिल्प, क्विज और वैदिक गणित जैसे कार्यक्रम हुए। शाम के समय संगीत और सेना के बैंड की प्रस्तुतियों ने भी माहौल को और रंगीन बनाया। इस बार विश्व पुस्तक मेले ने यह साबित कर दिया कि जब किताबें सुलभ होती हैं, तो लोग जरूर पढ़ने आते हैं। यह मेला सच में पढ़ने की आदत को बढ़ाने वाला एक राष्ट्रीय उत्सव बनकर उभरा।
भारतीय सैन्य थीम पवेलियन रहा खास आकर्षण
वर्ल्ड बुक फेयर में बना थीम पवेलियन इस बार खास आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस पवेलियन में भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता, परंपरा और आधुनिक ताकत को एक साथ दिखाया गया। करीब 1000 वर्ग मीटर में बने इस पवेलियन में भारतीय सेना के इतिहास से जुड़ी 500 से ज्यादा किताबें, अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और तेजस के मॉडल, और 21 परमवीर चक्र विजेताओं की जानकारी प्रदर्शित की गई। सेना प्रमुख और नौसेना प्रमुख ने भी पवेलियन का दौरा किया और युवाओं को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन इस बार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। इस दौरान कतर और स्पेन के संस्कृति मंत्री भी मौजूद रहे।
जानी-मानी हस्तियां हुईं शामिल
मेले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी समेत कई बड़े नाम पहुंचे। लेखक और वक्ता के रूप में स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, कैलाश सत्यार्थी, जया किशोरी, रिकी केज सहित कई जानी-मानी हस्तियां मेले में पहुंचीं।