बीमारियों के यह है कारण
डॉ. रमेश मीणा के अनुसार, बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा खतरा पानी से होने वाली बीमारियों का रहता है। गंदे पानी या संक्रमित भोजन से डायरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या हो सकती है, जिसमें दस्त और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। इसके अलावा टाइफाइड में लंबे समय तक बुखार और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। दूषित पानी से हेपेटाइटिस ए और ई का संक्रमण भी हो सकता है, जिसमें पीलिया, थकान और जी मिचलाने जैसी परेशानी होती है। वहीं, हैजा (कॉलरा) में बहुत ज्यादा दस्त होने का खतरा रहता है।
नमी बढ़ने से होती है स्कीन एलर्जी
डॉ. मीणा ने बताया कि मानसून में नमी बढ़ने और बंद जगहों पर रहने से हवा और संपर्क के जरिए फैलने वाले संक्रमण भी बढ़ जाते हैं। वायरल बुखार, फ्लू और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। जलभराव वाले इलाकों में गंदे पानी के संपर्क से लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा भी रहता है। यह बीमारी चूहों के पेशाब से दूषित पानी के संपर्क में आने से हो सकती है, जिसमें बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
बारिश के दौरान गीले कपड़े और जूते पहनने से फंगल इंफेक्शन की समस्या भी बढ़ जाती है। दाद और एथलीट फुट जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। इसके अलावा कंजंक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू तेजी से फैल सकता है। नमी, सीलन और फफूंद के कारण स्किन इंफेक्शन के साथ-साथ सांस से जुड़ी एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी भी बढ़ सकती है।
ऐसे करें बचाव
-पीने के लिए हमेशा उबला हुआ, फिल्टर या आरओ का पानी इस्तेमाल करें।
-कटे हुए फल, खुले में रखा खाना और सड़क किनारे मिलने वाली चाट से बचें।
-घर और आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रकोप न बढ़े।
-मच्छर से बचने के लिए रिपेलेंट का इस्तेमाल करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मच्छरदानी लगाएं।
-खाना खाने से पहले और बाद में हाथ जरूर धोएं।
-पैरों को सूखा रखें और गंदे पानी में चलने से बचें।
-मानसून में हमेशा गर्म और ताजा बना हुआ खाना खाएं।