शुल्क बढ़ाने से पहले पार्किंग की
जगह बताए परिवहन विभाग
- फैसले के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने दी कोर्ट जाने और चक्का जाम की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन विभाग द्वारा वाहनों का वन टाइम पार्किंग शुल्क बढ़ाए जाने का दिल्ली की ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने विरोध किया है। व्यवसायिक वाहन चालकों पर हालांकि घरेलू वाहनों की तुलना में पार्किंग शुल्क कम बढ़ा है, लेकिन पार्किंग शुल्क की मार से बचने के लिए यूनियनों ने सरकार से अपील की है कि इस फैसले को वापस लिया जाए। अगर सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती है तो व्यावसायिक वाहन चालक इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे।
भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के उपाध्यक्ष चंदू चौरसिया ने कहा कि राजधानी में निगम द्वारा पार्किंग शुल्क पहले से ही लिया जा रहा है और व्यावसायिक वाहनों से यह शुल्क हर साल लिया जाता है। इस हिसाब से उन्हें जिस आरटीवी के लिए पहले 2500 रुपये वार्षिक देने पड़ते थे, अब उन्हें 10,000 रुपये देने होंगे। उन्होंने कहा कि एक आरटीवी की अवधि 10 साल की होती है, ऐसे में उन्हें एक वाहन के लिए 10 साल में एक लाख 20 हजार रुपये देने होंगे, जबकि सुविधा के नाम पर दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग और दिल्ली नगर निगम द्वारा राजधानी में कहीं भी पार्किंग की सुविधा नहीं दी जाती।
वहीं, दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि पार्किंग शुल्क बढ़ाने से व्यवसायिक वाहन चालकों पर आर्थिक भार बढ़ेगा। उन्होंने इस वृद्धि के जारी होते ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस फैसले को रद्द करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। माल वाहनों पर पार्किंग शुल्क बढ़ाए जाने से मालिक वाहनों का किराया बढ़ाएंगे, जिसका असर आम लोगों पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को इस फैसले को वापस लेना होगा।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष कुलतरण सिंह अटवाल ने कहा कि सरकार ने ट्रांसपोर्टरों के साथ धोखा किया है। सबसे ज्यादा असर ट्रकों पर है। काम मंदा है और डीजल की महंगाई की वजह से पहले ही वाहन चालक परेशान हैं। पार्किंग शुल्क बढ़ाने से पहले सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले कई सालों में पार्किंग शुल्क के नाम पर लिए गए पैसे से कहां पार्किंग बनाई गई। उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया जाता है तो वह अन्य ट्रांसपोर्ट यूनियनों के साथ मिलकर दिल्ली में दो दिन का चक्का जाम करेंगे।