हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निर्धारित समयसीमा में डिक्लेयरेशन फार्म न देने वाले करीब 80 बिल्डरों का कॉमन एरिया से अधिकार खत्म हो गया है।
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में जीडीए ने शहर के ऐसे सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिए हैं। बिल्डरों को कॉमन एरिया से कब्जा हटाने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक कॉमन एरिया पर रेजिडेंट्स का डीम्ड राइट माना जाएगा। रेजिडेंट्स ने इस फैसले पर खुशी जताई है।
हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 13 को अपने आदेश में यह स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समयसीमा में फार्म न जमा करने वाले बिल्डर प्रोजेक्ट्स के इंडिपेडेंट एरिया पर बिल्डरों का अधिकार खत्म माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के वकील एसके पॉल केमुताबिक जिन बिल्डरों ने एक्ट लागू होने (2010) से पहले प्रोजेक्ट का नक्शा पास कराया था, उन्हें हर हाल में 90 दिनों के भीतर डिक्लेयरेशन देना अनिवार्य था।
सुप्रीमकोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। जीडीए द्वारा बिल्डरों को बार-बार डिक्लेयरेशन फार्म जमा करने के नोटिस के बावजूद अब तक बड़ी संख्या में बिल्डरों ने फार्म जमा नहीं किए हैं।
जीडीए ओएसडी एसपी गुप्त ने बताया कि डिक्लेयरेशन फार्म न जमा करने वाले बिल्डरों को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर लिमिटेड कॉमन एरिया एंड फैसिलिटीज और इंडीपेंडेंट एरिया से कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए हैं। कब्जा हटाने के बाद इस एरिया के अधिकार पर नियम संगत कार्रवाई होगी।
फेडरेशन ऑफ एओए के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि अब जिन सोसायटीज में एसोसिएशन गठित है, वहां कॉमन एरिया का मालिकाना हक सोसायटीज का होगा। सामुदायिक सुविधाओं की एवज में मिलने वाली धनराशि सोसायटीज प्रोजेक्ट के रखरखाव में खर्च करेंगी।