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आरएमएल अस्पताल में पहली बार युवा किडनी का प्रत्यारोपण

Fri, 20 Sep 2019 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में पहली बार सबसे युवा ब्रेन डेड मरीज के अंगों का दान किया गया
  • दिल्ली के झंडेवालान इलाके में फूल की दुकान पर काम करने वाला 21 वर्षीय युवक मूलरूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का निवासी है
  • सिर पर चोट लगने की वजह से बीते बुधवार आरएमएल अस्पताल में भर्ती हुआ था
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जसवंत का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में पहली बार सबसे युवा ब्रेन डेड मरीज के अंगों का दान किया गया। दिल्ली के झंडेवालान इलाके में फूल की दुकान पर काम करने वाला 21 वर्षीय युवक मूलरूप से उत्तर प्रदेश के झांसी का निवासी है। 

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सिर पर चोट लगने की वजह से बीते बुधवार आरएमएल अस्पताल में भर्ती हुआ था। न्यूरो सर्जरी के वरिष्ठ डॉ. एलएन गुप्ता ने बताया कि युवक के सिर में गंभीर चोट थी। उसकी गर्दन की हड्डी में फ्रैक्चर था। इसके कारण ब्रेन में ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो रहा था, जबकि बाकी शरीर में ब्लड सर्कुलेशन था। 

प्रत्यारोपण से पहले मरीज को दो बार ब्रेन डेड घोषित करना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि दोपहर में ब्रेन डेड होने के चलते डॉक्टरों ने परिजनों की काउंसलिंग की, उन्हें बताया कि अंगदान के जरिये वे कई लोगों को नया जीवन दे सकते हैं। परिजनों की मंजूरी मिलने के बाद बुधवार दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर युवक को ब्रेन डेड घोषित किया गया।
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इसके बाद राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) को सूचना दी गई। थोड़ी ही देर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों की टीम आरएमएल पहुंची और युवक का एक लिवर और एक किडनी अपने यहां ले जाकर प्रत्यारोपित की। वहीं एक किडनी को आरएमएल अस्पताल में ही नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु महापात्रा की टीम ने प्रत्यारोपित किया। इस मरीज की आयु करीब 43 वर्ष है। 

वर्ष 2017 से ये मरीज डायलिसिस पर हैं। किडनी प्रत्यारोपण के लिए ये दो बार आरएमएल अस्पताल आ चुके हैं। डॉ. महापात्रा ने बताया कि उनके यहां अब तक करीब 250 किडनी प्रत्यारोपण हो चुके हैं, जबकि कैडेवर यानी ब्रेन डेड से अंग लेने के बाद प्रत्यारोपण करने का ये 12वां केस है। इसमें से महज दो बार ही आरएमएल में ब्रेन डेड मरीज के अंगों को प्रत्यारोपित करने के लिए निकाला गया है। 

गौर करने वाली बात है कि दोनों ही बार आरएमएल की टीम हृदय प्रत्यारोपण नहीं कर सकी, क्योंकि ब्रेन डेड के दौरान मरीज को कार्डिएक अरेस्ट हुआ था। 

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण में अस्पताल बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। मरीजों की वेटिंग लिस्ट करीब 100 के आसपास है, जिसे कम करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्यारोपण बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में मोतीबाग स्थित निर्माणाधीन 300 बिस्तरों के अस्पताल में दो ऑपरेशन थियेटर भी बनाए जा रहे हैं। ऐसा होने से प्रत्यारोपण में तेजी आएगी।

लिवर प्रत्यारोपण की तैयारियां भी शुरू
डॉ. वीके तिवारी ने बताया कि लिवर प्रत्यारोपण की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। चार विभागों को मिलाकर तकरीबन 14 लोगों की टीम करीब एक साल के प्रशिक्षण पर है। इतना ही नहीं लंबे समय से हृदय प्रत्यारोपण न होने पर उन्होंने कहा कि इसके लिए भी काम चल रहा है। अगले कुछ वर्षों में आरएमएल अस्पताल में एम्स की तरह लगभग सभी प्रत्यारोपण करने की क्षमता होगी। 

प्रत्यारोपण से पहले पुलिस से ली मंजूरी
परिजनों के अनुसार, दवा खाने के बाद युवक चक्कर आने की बार-बार शिकायत कर रहा था, इसलिए बुधवार को वह रास्ते पर ही कहीं गिर गया था। राहगीरों की मदद से उसे आरएमएल अस्पताल भर्ती कराया गया, उसकी जेब से निकले कागजों पर भाई का नंबर था, जिसके जरिये अस्पताल की ओर से मरीज की सूचना उन तक पहुंची। चूंकि ये मामला मेडिको लीगल केस (एमएलसी) से जुड़ा था, इसलिए पुलिस से मंजूरी ली गई। 

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